सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में पुलिस ने उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैले कथित अंतरराज्यीय पशु तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पशुओं की खरीद-बिक्री, परिवहन और धन के लेनदेन के लिए एक सुव्यवस्थित वित्तीय तंत्र तैयार कर रखा था। अब तक की जांच में केवल 25 बैंक खातों में ₹100 करोड़ से अधिक के लेनदेन का पता चला है। मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच जारी है।
जांच के अनुसार इस नेटवर्क के तार बिहार के रोहतास और कैमूर जिलों से लेकर पश्चिम बंगाल के पांडुआ और मेमारी तक जुड़े हुए हैं। पश्चिम बंगाल निवासी राजा कुरैशी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू की, जिसमें करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर धन के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं।
पुलिस जांच में पता चला कि पशु तस्करी से प्राप्त धनराशि सबसे पहले पश्चिम बंगाल के पांडुआ-मेमारी क्षेत्र में रहने वाले राजा कुरैशी तक पहुंचती थी। इसके बाद रकम को ₹49,000 और ₹99,000 जैसी छोटी-छोटी किश्तों में विभाजित कर बिहार के रोहतास जिले के खुरमाबाद निवासी शेख सुल्तान अली की फर्मों, जिनमें फुरकान ट्रेडर्स, चंदा ट्रेडर्स और अन्य बैंक खाते शामिल हैं, में भेजा जाता था। अधिकारियों का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन को सामान्य व्यावसायिक भुगतान का स्वरूप देने और निगरानी से बचने के उद्देश्य से किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि कैमूर जिले के चैनपुर निवासी मोहम्मद अमीनूद्दीन के खाते में भी बड़ी मात्रा में रकम भेजी जाती थी। इसके अलावा खुरमाबाद निवासी गुड्डू उर्फ शमशाद कुरैशी तथा चैनपुर के अफजल कुरैशी और शहजाद कुरैशी के खातों में भी धन जमा किया जाता था। बाद में यह रकम एटीएम निकासी और यूपीआई लेनदेन के जरिए स्थानीय पशु तस्करों तक पहुंचाई जाती थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि धन का एक बड़ा हिस्सा संदीप सिंह के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) खाते में भेजा गया, जहां से इसे रीशू यादव, विकास यादव और भगवान यादव सहित अन्य खातों में स्थानांतरित किया जाता था।
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पूछताछ में मुख्य आरोपी राजा कुरैशी ने कथित तौर पर खुलासा किया कि पूरा पशु तस्करी नेटवर्क पांच स्तरों में संचालित होता था। पहले चरण में सोनभद्र, मिर्जापुर और वाराणसी क्षेत्रों से छोटे वाहनों के माध्यम से पशुओं की खरीद की जाती थी। दूसरे चरण में इन्हें बिहार के चैनपुर और खुरमाबाद पहुंचाया जाता था। तीसरे चरण में विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से वित्तीय लेनदेन संचालित किया जाता था। चौथे चरण में 50 से 80 पशुओं को बड़े कंटेनरों में भरकर पश्चिम बंगाल के पांडुआ पशु बाजार या मेमारी तक भेजा जाता था। अंतिम चरण में स्थानीय व्यापारियों के माध्यम से पशुओं की खरीद-बिक्री कर उन्हें आगे वधशालाओं तक पहुंचाया जाता था।
जांच में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) खातों के कथित दुरुपयोग का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार चंदा ट्रेडर्स, फुरकान ट्रेडर्स और अन्य सीएससी खातों का उपयोग धन के फेरबदल के लिए किया जा रहा था। सीधे भुगतान करने के बजाय रकम को कई चरणों में अलग-अलग खातों में भेजा जाता था, जिससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपी रहे और वित्तीय लेनदेन पर निगरानी रखने वाली एजेंसियों को संदेह न हो। अब इन खातों के केवाईसी दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन जांच की जा रही है।
मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों में राजा कुरैशी, जियाउल उर्फ जियाउद्दीन, रीशू यादव, प्रमोद कुमार, शिवमंगल यादव, शेख सुल्तान अली, निरंजन कुमार, भगवान यादव, मोहम्मद अमीनूद्दीन, विनोद सोनकर तथा गोरख उर्फ हजारी प्रसाद शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर अन्य राज्यों में भी संभावित ठिकानों और सहयोगियों की पहचान की जा रही है। फरार आरोपियों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड तथा संदिग्ध व्यक्तियों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार मामले के वित्तीय पहलू, संभावित मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराज्यीय नेटवर्क के सभी स्तरों की जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
