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सस्ते लैपटॉप का झांसा, फिर AI से अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग; छात्र की मौत के मामले में ₹25 हजार का इनामी गिरफ्तार

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By Roopa
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सोनभद्र: सस्ते लैपटॉप का लालच देकर एक छात्र को साइबर ठगी के जाल में फंसाने और बाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उसका कथित अश्लील वीडियो तैयार कर ब्लैकमेल करने के मामले में पुलिस ने राजस्थान से ₹25 हजार के इनामी आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वीडियो को छात्र के परिचितों, रिश्तेदारों और दोस्तों तक भेजने की धमकी देकर उससे लगातार पैसे मांगे जा रहे थे। मानसिक दबाव के बीच छात्र की मौत हो गई थी। जांच में मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और आरोपी के फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची।

मामला सोनभद्र के बीजपुर थाना क्षेत्र का है। नेमना गांव निवासी 20 वर्षीय स्नातक छात्र को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से लगातार कॉल आ रही थीं। घटना के बाद पुलिस ने छात्र के मोबाइल और बैंक खातों की जांच शुरू की। डिजिटल जांच में सामने आया कि संदिग्ध कॉल राजस्थान के अलवर क्षेत्र से की जा रही थीं और छात्र के खाते से भी रकम वहां भेजी गई थी। इसके बाद जांच का दायरा राजस्थान तक बढ़ाया गया।

पुलिस टीम ने राजस्थान के खैरतल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास थाना क्षेत्र के पड़ासला निवासी वारिस खान को गिरफ्तार किया। उसके पास से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन, सिम कार्ड और ₹1,050 नकद बरामद किए गए। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर सोनभद्र लाया गया, जहां अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

जांच में सामने आया कि आरोपी ने फेसबुक पर सस्ते लैपटॉप का विज्ञापन पोस्ट किया था। छात्र ने लैपटॉप खरीदने के लिए उससे संपर्क किया। आरोप है कि आरोपी ने सामान भेजने, टैक्स और प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर छात्र से करीब ₹14,500 वसूल लिए। इसके बाद कथित तौर पर एक लिंक भेजकर उसके मोबाइल तक पहुंच हासिल की गई और उसमें मौजूद निजी डेटा का इस्तेमाल किया गया।

आरोप है कि इसी डेटा की मदद से AI तकनीक के जरिए छात्र का अश्लील वीडियो तैयार किया गया। इसके बाद आरोपी ने वीडियो को उसके परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों तक पहुंचाने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। लगातार दबाव और धमकियों के कारण छात्र गंभीर मानसिक परेशानी में आ गया। पांच जून को उसकी मौत हो गई।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, AI आधारित फर्जी अश्लील सामग्री का इस्तेमाल अब साइबर अपराधियों के लिए ब्लैकमेलिंग का एक खतरनाक हथियार बनता जा रहा है। ऐसे मामलों में पीड़ित को तुरंत पैसे देने के बजाय घटना की सूचना पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन को देनी चाहिए। उनके अनुसार, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, भुगतान की जानकारी और संदिग्ध लिंक की तकनीकी जांच से अपराधियों की पहचान में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं।

आरोपी के फोन से मिले लेनदेन के साक्ष्य

पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की तो कथित ठगी की रकम से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले। जांच में यह भी सामने आया कि पांच जून को संबंधित धनराशि आरोपी के मोबाइल वॉलेट में पहुंची थी। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि रकम का कुछ हिस्सा उसने खर्च कर दिया था और ₹1,050 उसके पास बचे थे।

जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि छात्र के मोबाइल से कौन-कौन सा डेटा हासिल किया गया और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। साथ ही कथित अश्लील सामग्री तैयार करने और उसे प्रसारित करने में किसी अन्य व्यक्ति या डिजिटल माध्यम की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

कई राज्यों में ठगी के मामलों का रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार, आरोपी का नाम साइबर ठगी के कई अन्य मामलों में भी सामने आया है। जांच में हरियाणा में टेलीग्राम टास्क फ्रॉड के जरिए ₹15,740, गुजरात में कस्टमर केयर बनकर ₹3,860, राजस्थान में लैपटॉप बेचने के नाम पर ₹13,327 और पश्चिम बंगाल में पुराने नोट बदलकर नई करेंसी देने के नाम पर ₹50,950 की कथित ठगी के मामले सामने आए हैं।

पुलिस अब आरोपी के संपर्क में रहे अन्य लोगों और कथित साइबर नेटवर्क की पहचान कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर संभावित सहयोगियों की तलाश में अलग-अलग स्तर पर जांच जारी है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि AI से तैयार कथित आपत्तिजनक सामग्री के पीछे तकनीकी सहायता किसने उपलब्ध कराई और ऐसे कितने अन्य लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया गया।

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