चेन्नई: तमिलनाडु एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) ने अमेरिका में कार्यरत एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को देशभर में बम विस्फोट की फर्जी धमकियां भेजने के आरोप में चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2023 से 2025 के बीच एयरपोर्ट, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक अधिकारियों और कई अन्य हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों एवं संस्थानों को ईमेल के माध्यम से बम होने की झूठी धमकियां भेजीं, जिससे कई राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों को व्यापक तलाशी अभियान चलाने पड़े और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान शरत सुब्रमणियन शंकर के रूप में हुई है। वह तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के अंबासमुद्रम का निवासी है और पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका के टेक्सास राज्य के ऑस्टिन शहर में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत था। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के भारत पहुंचते ही उसे चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी पर संदेह है कि उसने अलग-अलग समय पर अनेक संस्थानों को ईमेल भेजकर बम विस्फोट की धमकी दी। इन धमकियों के बाद कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी, बम निरोधक दस्तों और पुलिस ने तलाशी अभियान चलाए तथा कुछ मामलों में उड़ानों और अन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा। हालांकि प्रत्येक मामले में जांच के बाद धमकियां फर्जी साबित हुईं।
प्रारंभिक जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए किन डिजिटल माध्यमों, ईमेल खातों और इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल किया। जांच एजेंसियां उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड का भी परीक्षण कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसने यह कार्रवाई अकेले की थी या किसी अन्य व्यक्ति अथवा समूह की भी इसमें भूमिका थी।
अधिकारियों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज कई मामलों और धमकी भरे ईमेल के पैटर्न का विश्लेषण करने के बाद जांच एजेंसियां आरोपी तक पहुंचीं। इसके बाद उसके भारत आने की जानकारी मिलने पर निगरानी बढ़ाई गई और चेन्नई हवाई अड्डे पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अब उससे विस्तृत पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी धमकियां भेजने के पीछे उसका उद्देश्य क्या था और उसने किन-किन घटनाओं में कथित रूप से भूमिका निभाई।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बम की झूठी धमकियां केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं होतीं, बल्कि इनसे सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हर धमकी को गंभीरता से लेना पड़ता है, जिसके कारण पुलिस, बम निरोधक दस्तों, अग्निशमन सेवाओं और अन्य आपातकालीन एजेंसियों को बड़े पैमाने पर तैनात करना पड़ता है। इससे प्रशासनिक संसाधनों की खपत बढ़ती है और आम नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
Future Crime Research Foundation से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल माध्यमों से भेजी जाने वाली फर्जी धमकियां आधुनिक साइबर अपराध का एक गंभीर रूप बनती जा रही हैं। ऐसे मामलों में ईमेल हेडर, आईपी लॉग, डिवाइस फॉरेंसिक, क्लाउड रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले डिजिटल नेटवर्क के कारण जांच एजेंसियों को विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय भी करना पड़ सकता है।
फिलहाल एटीएस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वर्ष 2023 से 2025 के दौरान देशभर में भेजी गई फर्जी बम धमकियों की पूरी श्रृंखला में उसकी क्या भूमिका रही। जांच के आधार पर आगे अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
