नई दिल्ली: महर्षि आश्रम से जुड़े स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SMRF) ट्रस्ट की जमीन कथित रूप से फर्जी तरीके से बेचने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी ने मामले में आरोपियों की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में आरोपियों द्वारा बनाई गई करोड़ों रुपये की संपत्तियों की जानकारी सामने आई है।
मामले में प्रदीप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय को मुख्य आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने ट्रस्ट के फर्जी पदाधिकारी बनकर और कथित रूप से जाली दस्तावेज तैयार कर ट्रस्ट की जमीन को बेचने की साजिश रची। इस मामले में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में धोखाधड़ी तथा जालसाजी से संबंधित प्राथमिकी दर्ज हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों में जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदीं। इनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर, धार और सुनेरा क्षेत्रों के अलावा छत्तीसगढ़ के दुर्ग, बलौदा बाजार और बिलासपुर की संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक के बेंगलुरु समेत कई स्थानों पर भी संपत्तियों की जानकारी जांच के दायरे में आई है। एजेंसियां अब इन संपत्तियों के स्रोत और खरीद में इस्तेमाल धन की जांच कर रही हैं।
मामले में नोएडा स्थित ट्रस्ट की जमीन की खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगा दी गई है। सेक्टर-33ए स्थित रजिस्ट्री कार्यालय ने एसएमआरएफ ट्रस्ट की भंगेल स्थित खसरा संख्या 217 और गेझा तिलपताबाद के खसरा संख्या 14, 16, 96, 98, 99, 100 तथा 102-1 की जमीन की बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगाई है। ट्रस्ट की ओर से 15 जुलाई को संबंधित विभाग को पत्र देकर जमीन की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी।
ट्रस्ट अध्यक्ष यादवेंद्र सिंह के अनुसार, शिकायत के बाद संबंधित खसरा नंबर वाली जमीनों की खरीद-फरोख्त रोक दी गई है। अधिकारियों ने ट्रस्ट की शिकायत और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह कदम उठाया है।
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यह मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था, जिसके बाद ईडी ने जांच शुरू की। जांच में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने फर्जी पदाधिकारियों और दस्तावेजों के आधार पर करीब 33 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को सिंहवाहिनी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स को लगभग 16 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस संबंध में नोएडा के सेक्टर-39 थाने में मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान ईडी ने नोएडा रजिस्ट्री विभाग से ट्रस्ट की जमीन से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद वर्ष 1990 से अब तक हुई 36 से अधिक रजिस्ट्रियों की जानकारी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई गई। ट्रस्ट का आरोप है कि गेझा तिलपताबाद और भंगेल क्षेत्र में करीब 3.36 हेक्टेयर जमीन फर्जी पदाधिकारियों और दस्तावेजों के जरिए बेची गई।
इस मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक राघवेंद्र प्रताप सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कथित फर्जीवाड़े की जांच ईडी को सौंप दी थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े अन्य राज्यों के रिकॉर्ड भी खंगालने शुरू किए।
ईडी ने 10 जुलाई को जांच रिपोर्ट में नोएडा के अलावा अन्य राज्यों में मौजूद आरोपियों की संपत्तियों और उनके खिलाफ दर्ज मामलों का उल्लेख किया। रिपोर्ट में कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित यशवंतपुरा समेत कई अन्य स्थानों से जुड़े संपत्ति रिकॉर्ड सामने आने की बात कही गई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित धोखाधड़ी से हासिल धन का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया और क्या अन्य लोग भी इस नेटवर्क में शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच में यदि आरोप साबित होते हैं तो आरोपियों की चिन्हित संपत्तियों को कानून के तहत कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। मामले में आगे की जांच जारी है।
