नई दिल्ली: सिंगापुर के श्रम मंत्रालय (Ministry of Manpower-MOM) ने रोजगार से जुड़े कथित धोखाधड़ी और अवैध भर्ती नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। कई स्थानों पर एक साथ चलाए गए प्रवर्तन अभियान में चार कंपनी निदेशक, नौ विदेशी कर्मचारी और एक रोजगार एजेंसी के प्रमुख पदाधिकारी को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, सभी पर विदेशी श्रमिकों की भर्ती से जुड़े नियमों का उल्लंघन, फर्जी घोषणाएं करने, रोजगार से जुड़े अवैध कमीशन (किकबैक) लेने और बिना लाइसेंस रोजगार एजेंसी गतिविधियां संचालित करने के आरोपों की जांच की जा रही है।
श्रम मंत्रालय के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी श्रमिकों को अधिक संख्या में नियुक्त करने के लिए कथित तौर पर अपने विदेशी श्रमिक कोटा को कृत्रिम रूप से बढ़ाया। इसके लिए रोजगार से संबंधित दस्तावेजों और कार्य अनुमति (वर्क पास) आवेदन में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस प्रक्रिया के जरिए कंपनियों ने निर्धारित नियमों से अधिक विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की कोशिश की।
मामले की जांच के दौरान एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। मंत्रालय के अनुसार, 139 स्थानीय नागरिकों के नाम पर सेंट्रल प्रोविडेंट फंड (CPF) में कथित रूप से फर्जी अंशदान जमा किए गए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि ये लोग वास्तव में संबंधित कंपनियों के कर्मचारी नहीं थे, बल्कि केवल रिकॉर्ड में दिखाए गए ‘फैंटम वर्कर’ थे। आरोप है कि इन कथित कर्मचारियों के नाम पर सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा कर कंपनियों ने यह दिखाने का प्रयास किया कि उनके यहां स्थानीय कर्मचारियों की संख्या अधिक है, जिससे उन्हें विदेशी श्रमिकों का अतिरिक्त कोटा मिल सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह जांच केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार एजेंसियों और कंपनियों के बीच संभावित मिलीभगत की भी पड़ताल की जा रही है। एक रोजगार एजेंसी के प्रमुख पदाधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या विदेशी श्रमिकों की भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया में संगठित स्तर पर नियमों का दुरुपयोग किया गया।
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सिंगापुर के Employment of Foreign Manpower Act (EFMA) के तहत कार्य अनुमति आवेदन में झूठी घोषणा करना गंभीर अपराध माना जाता है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 20,000 सिंगापुर डॉलर का जुर्माना, दो वर्ष तक की कैद या दोनों सजा का प्रावधान है। इसके अलावा दोषसिद्धि के बाद संबंधित व्यक्ति या संस्था को भविष्य में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने से भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति कंपनियों के साथ मिलकर विदेशी श्रमिक कोटा बढ़ाने के उद्देश्य से अपने नाम का दुरुपयोग होने देता है या फर्जी CPF अंशदान के लिए अपनी जानकारी उपलब्ध कराता है, तो उसके खिलाफ भी झूठी घोषणा में सहयोग (abetment) के आरोप में मुकदमा चलाया जा सकता है। ऐसे मामलों में भी समान दंड का प्रावधान है।
जांच में रोजगार से जुड़े अवैध कमीशन या किकबैक लेने के आरोप भी शामिल हैं। सिंगापुर के कानून के अनुसार रोजगार दिलाने या बनाए रखने के बदले अवैध रूप से धन वसूलना दंडनीय अपराध है। इस अपराध में अधिकतम 30,000 सिंगापुर डॉलर का जुर्माना, दो वर्ष तक की कैद या दोनों सजा हो सकती है।
श्रम मंत्रालय ने कहा है कि जांच अभी जारी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, भर्ती दस्तावेजों और रोजगार एजेंसियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला संगठित रोजगार धोखाधड़ी का एक बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है। मंत्रालय ने दोहराया कि रोजगार प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने और विदेशी श्रमिकों की भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
