नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने देश की प्रमुख स्वर्ण परिष्करण और निर्यात कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स तथा उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ एक बड़े नियामकीय कदम के तहत अंतरिम आदेश जारी किया है। बाजार नियामक का आरोप है कि कंपनी और उसके प्रमोटर ने वित्तीय विवरणों में कथित हेराफेरी कर निवेशकों को गुमराह किया तथा कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति के बारे में गलत तस्वीर पेश की। SEBI के अनुसार, जांच में सामने आए कथित अनियमितताओं का आकार ₹1 लाख करोड़ से अधिक का है।
यह कार्रवाई 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 के बीच कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और कारोबारी गतिविधियों की विस्तृत जांच के बाद की गई है। जांच के दौरान नियामक ने कंपनी के खातों, विदेशी कारोबार, राजस्व विवरण, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड तथा निवेशकों को उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का परीक्षण किया।
SEBI के अंतरिम आदेश के अनुसार, कंपनी पर निवेशकों को महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी उपलब्ध न कराने, बिक्री और खरीद के आंकड़ों को गलत तरीके से दर्ज करने, राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने तथा विभिन्न वित्तीय मदों से जुड़े कथित भ्रामक विवरण प्रस्तुत करने के आरोप हैं। नियामक का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति का सही आकलन करने में कठिनाई हुई।
जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी की कारोबारी संरचना भारत तक सीमित नहीं थी। राजेश एक्सपोर्ट्स का परिचालन भारत के अलावा सिंगापुर, संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों तक फैला हुआ था। SEBI के अनुसार, विदेशी इकाइयों का कंपनी की समग्र वित्तीय स्थिति में महत्वपूर्ण योगदान था, लेकिन इन परिचालनों से संबंधित आवश्यक जानकारी का पर्याप्त खुलासा नहीं किया गया।
नियामक ने कहा कि विदेशी कारोबार से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड न केवल अपूर्ण पाए गए बल्कि कई मामलों में वैधानिक प्रकटीकरण आवश्यकताओं का भी पालन नहीं किया गया। इससे कंपनी के खातों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। SEBI का मानना है कि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए वित्तीय जानकारी का सही और समयबद्ध खुलासा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान कंपनी और उसके प्रमोटर का रवैया सहयोगात्मक नहीं था। SEBI ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने में बाधाएं उत्पन्न की गईं और कुछ मामलों में भ्रामक जानकारी भी दी गई। नियामक का कहना है कि इस प्रकार का आचरण जांच प्रक्रिया को प्रभावित करता है और बाजार की पारदर्शिता के लिए खतरा पैदा करता है।
इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर SEBI ने अंतरिम राहतात्मक कदम उठाते हुए कंपनी और उसके प्रमोटर पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। आदेश के तहत राजेश एक्सपोर्ट्स और राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में लेनदेन करने से रोक दिया गया है। साथ ही उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करने और सभी लंबित प्रकटीकरण आवश्यकताओं का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि यह एक अंतरिम और एकतरफा (एक्स-पार्टी) आदेश है, इसलिए कंपनी और उसके प्रमोटर को नियमानुसार अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। आगामी सुनवाई के दौरान वे SEBI के निष्कर्षों को चुनौती दे सकते हैं और अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। अंतिम निर्णय सुनवाई और आगे की जांच के आधार पर लिया जाएगा।
वित्तीय और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारतीय पूंजी बाजार में कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है। सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा गलत या अधूरी जानकारी उपलब्ध कराए जाने से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है और बाजार की निष्पक्षता पर भी असर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच के निष्कर्ष अंतिम रूप से साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों में भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामलों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर SEBI की आगे की कार्रवाई तथा आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि इस मामले का असर न केवल संबंधित कंपनी बल्कि व्यापक बाजार नियामकीय ढांचे पर भी पड़ सकता है।
