अहमदाबाद के मैट्रिमोनियल फ्रॉड मामले की जांच में पुलिस को बड़ा डिजिटल सबूत मिला है। आरोपी के मोबाइल फोन से 8,000 से अधिक फोटो और वीडियो फाइलें बरामद हुई हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह किसी संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं को निशाना बनाया गया है।
आरोपी की पहचान करीम सिपाई के रूप में हुई है, जिस पर आरोप है कि उसने मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर “आदित्य पटेल” नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को ठगा। बताया जा रहा है कि उसने खासकर विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को निशाना बनाया और भरोसा जीतने के लिए लंबे समय तक बातचीत की।
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जांच के अनुसार, आरोपी ने फर्जी पहचान के जरिए संपर्क स्थापित किया और धीरे-धीरे निजी वीडियो कॉल तक पहुंच बनाया। आरोप है कि इन कॉल्स के दौरान बिना अनुमति स्क्रीन रिकॉर्डिंग की गई और आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री का बड़ा संग्रह तैयार किया गया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने इस फर्जी पहचान के जरिए 100 से अधिक महिलाओं से संपर्क किया हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए मोबाइल में अलग-अलग फोल्डर बनाए गए थे, जिनमें महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो व्यवस्थित तरीके से रखे गए थे। इससे संकेत मिलता है कि यह केवल व्यक्तिगत गतिविधि नहीं बल्कि एक योजनाबद्ध प्रक्रिया थी। 8,000 से अधिक फाइलों की बरामदगी के बाद यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस सामग्री को किसी बाहरी प्लेटफॉर्म या संदिग्ध वेबसाइटों पर अपलोड या साझा किया गया था। हालांकि यह पहलू अभी जांच के दायरे में है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे, जिनमें पहचान से जुड़े रिकॉर्ड और एक कथित मृत्यु प्रमाण पत्र शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल भावनात्मक रूप से महिलाओं को प्रभावित करने और भरोसा कायम करने के लिए किया गया।
आरोपी खुद को एक सफल प्लास्टिक व्यापारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था। इसके बाद वह धीरे-धीरे भावनात्मक संबंध बनाता और फिर निजी बातचीत की ओर ले जाता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पैटर्न संभावित रूप से ब्लैकमेलिंग या आगे की धोखाधड़ी की ओर भी इशारा करता है।
महिला अपराध शाखा ने मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म से विस्तृत डेटा मांगा है ताकि फर्जी प्रोफाइल से जुड़े सभी इंटरैक्शन की पूरी जानकारी मिल सके। इसके साथ ही कॉल डिटेल्स, चैट हिस्ट्री, सोशल मीडिया अकाउंट्स और बैंक ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा रही है, ताकि अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान हो सके।
आरोपी को 14 जून को एक पीड़िता की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था। उस शिकायत के आधार पर अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की थी। उसके खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि सभी डिजिटल सबूतों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि उनकी प्रामाणिकता और समयरेखा स्पष्ट की जा सके। शुरुआती निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर पहचान आधारित धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इनके लिए सख्त वेरिफिकेशन सिस्टम की जरूरत है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि डिजिटल फॉरेंसिक टीम फाइलों के मेटाडेटा की जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि डेटा कब और कैसे बनाया गया और कहीं इसे बाहरी माध्यमों से साझा तो नहीं किया गया। जांच का फोकस अब इस बात पर है कि क्या किसी एन्क्रिप्टेड ऐप, थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म या विदेशी सर्वर का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित वित्तीय लाभ या ब्लैकमेलिंग के एंगल को भी समझा जा सके।
