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SCCL कोयला विवाद: ₹1,600 करोड़ के “लापता” कोयले पर घमासान, केंद्रीय मंत्री ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

Team The420
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सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कोयला कंपनी सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) को लेकर एक बड़े कथित घोटाले के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर लगभग 40 लाख टन कोयले के कथित गायब होने के मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस कथित कोयले की अनुमानित कीमत करीब ₹1,600 करोड़ बताई जा रही है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि SCCL केवल एक व्यावसायिक इकाई नहीं बल्कि भारत सरकार और तेलंगाना सरकार की संयुक्त भागीदारी वाली एक रणनीतिक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषकर दक्षिण भारत की ऊर्जा आपूर्ति में SCCL को एक अहम स्तंभ माना जाता है। ऐसे में बड़े पैमाने पर कोयले के कथित गायब होने की रिपोर्ट गंभीर चिंता का विषय है।

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पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि SCCL लगभग 40,000 से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका का आधार है। इस तरह की कथित अनियमितताएं न केवल कंपनी की साख पर सवाल उठाती हैं, बल्कि हजारों कर्मचारियों के भविष्य को भी प्रभावित कर सकती हैं।

इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार पर SCCL का ₹51,500 करोड़ से अधिक का बकाया लंबित है, जिसके कारण कंपनी पर भारी वित्तीय दबाव बना हुआ है। उनका कहना है कि एक ओर विशाल बकाया और दूसरी ओर कथित तौर पर भारी मात्रा में कोयले का गायब होना, कंपनी की वित्तीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए।

पत्र में कोयला खनन, भंडारण और परिवहन की निगरानी के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, जीपीएस आधारित ट्रांसपोर्ट मॉनिटरिंग और रियल-टाइम डेटा सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही नियमित आंतरिक ऑडिट और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कंपनी की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी स्तर पर कोयला चोरी, हेराफेरी या राजस्व नुकसान की संभावना को रोका जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में तथ्यों का विस्तृत सत्यापन जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावे कितने सही हैं।

SCCL को लेकर उठे इस विवाद ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक तनाव भी बढ़ा दिया है। हालांकि अब तक तेलंगाना सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में कोयले के गायब होने के आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक वित्तीय अनियमितता होगी बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें प्रस्तावित उच्चस्तरीय जांच पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि 40 लाख टन कोयले के कथित गायब होने के दावों में कितनी सच्चाई है और इसके पीछे वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।

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