छत्रपति संभाजीनगर GST खुफिया शाखा ने 2025-26 में 17 मामलों में ₹47.37 करोड़ की कर अनियमितताओं का खुलासा किया है।

₹47.37 करोड़ की GST चोरी का खुलासा: संभाजीनगर में 17 मामलों में कार्रवाई, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़े निशाने पर

Team The420
5 Min Read

छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित राज्य वस्तु एवं सेवा कर (GST) खुफिया एवं जांच शाखा ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कर चोरी के खिलाफ चलाए गए अभियान में 17 मामलों में कुल ₹47.37 करोड़ की कर अनियमितताओं का पता लगाया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) क्षेत्र इस कार्रवाई के केंद्र में रहे, जहां सबसे अधिक कर चोरी का खुलासा हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सरकारी राजस्व की सुरक्षा के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में कर अनुपालन को मजबूत करना है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े पांच मामलों में ₹22.04 करोड़ की कर अनियमितताएं सामने आईं, जो मूल्य के आधार पर सबसे अधिक हैं। वहीं निर्माण क्षेत्र में सर्वाधिक आठ मामलों की जांच की गई, जिनमें ₹20.34 करोड़ की कर चोरी का पता चला। इसके अतिरिक्त व्यापारियों से जुड़े चार मामलों में ₹4.92 करोड़ की कर अनियमितताएं उजागर हुईं। इस प्रकार विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र मिलकर कुल कर चोरी का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा रहे।

India’s Largest Cybercrime Conference Nears: FutureCrime Summit 2026 Set for 6–7 August at Bharat Mandapam

वित्त वर्ष 2025-26 की जांच प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने केवल कर चोरी का पता ही नहीं लगाया, बल्कि ₹26.63 करोड़ की वसूली भी की। इसमें ₹18.06 करोड़ नकद के रूप में वसूल किए गए, जबकि ₹8.57 करोड़ की राशि इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) समायोजन के माध्यम से प्राप्त हुई। यह दर्शाता है कि जांच एजेंसी ने कर वसूली की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है।

विभाग के अनुसार जांच के दौरान ऐसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया जिनमें कारोबार छिपाने, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने, फर्जी चालान (इनवॉइस) तैयार करने, कर चोरी तथा GST कानून के अन्य उल्लंघनों के संकेत मिले थे। खुफिया सूचनाओं और दस्तावेजी विश्लेषण के आधार पर इन मामलों की जांच आगे बढ़ाई गई, जिससे बड़े पैमाने पर कर अनियमितताओं का खुलासा हुआ।

रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि जांच शाखा ने उच्च मूल्य वाले मामलों पर विशेष फोकस रखा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रति मामले औसतन ₹2.78 करोड़ से अधिक की कर अनियमितता का पता चला। इससे संकेत मिलता है कि विभाग ने केवल मामलों की संख्या बढ़ाने के बजाय बड़े वित्तीय प्रभाव वाले मामलों की पहचान और जांच को प्राथमिकता दी।

छत्रपति संभाजीनगर GST आयुक्तालय मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ जिलों में GST प्रशासन का दायित्व संभालता है। विभाग नियमित रूप से खुफिया सूचनाओं के आधार पर कर चोरी की आशंका वाले मामलों की जांच करता है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया आंकड़े उन जांचों और वसूली का परिणाम हैं, जिन्हें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूरा किया गया।

Algoritha Security के एक शोधकर्ता के अनुसार, फर्जी इनवॉइसिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग अब वित्तीय अपराधों का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। डेटा विश्लेषण, डिजिटल ऑडिट ट्रेल और जोखिम-आधारित निगरानी प्रणालियों के प्रभावी उपयोग से ऐसे संगठित कर चोरी नेटवर्क की पहचान अधिक तेज़ी से की जा सकती है। समय रहते कार्रवाई से सरकारी राजस्व की सुरक्षा के साथ वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता भी मजबूत होती है।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि GST व्यवस्था में तकनीक आधारित निगरानी, ई-इनवॉइसिंग, डेटा मिलान और खुफिया विश्लेषण के कारण बड़े पैमाने पर कर चोरी का पता लगाना पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुआ है। उनका कहना है कि फर्जी ITC, कागजी कंपनियों और बनावटी लेनदेन के खिलाफ लगातार कार्रवाई से ईमानदार करदाताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धी माहौल बनेगा, जबकि कर चोरी में शामिल संस्थाओं के लिए नियामकीय जोखिम और कानूनी कार्रवाई दोनों बढ़ेंगी। सरकार की यह रणनीति दीर्घकाल में कर अनुपालन बढ़ाने और राजस्व संग्रह को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article