सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फर्जी फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नाम पर ₹50 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी का बड़ा मामला सामने आने के बाद कारोबारी जगत और विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह घोटाला संगठित तरीके से लंबे समय से चल रहा था, जिसमें कई जिलों के व्यापारी और फर्जी कंपनियों का जाल शामिल है।
जांच के दायरे में अब तक 100 से अधिक कारोबारी आ चुके हैं, जिनमें से 40 से ज्यादा फर्में केवल सहारनपुर जोन की बताई जा रही हैं। फर्जीवाड़े की परतें साइबर थाना पुलिस और राज्य कर विभाग की संयुक्त जांच में लगातार खुल रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कागजों में माल की खरीद-फरोख्त दिखाकर ITC का लाभ लिया, जबकि वास्तविक लेनदेन हुआ ही नहीं। इसके लिए फर्जी कंपनियां बनाई गईं और उनके माध्यम से नकली बिलिंग कर करोड़ों रुपये का टैक्स क्रेडिट क्लेम किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन फर्जी फर्मों को बनाने के लिए जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, उनमें कई ऐसे लोगों के आधार, पैन और पते शामिल थे, जिन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं थी। जांच में सामने आया है कि पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर कंपनियां खड़ी की गईं और उन्हें टैक्स नेटवर्क में सक्रिय दिखाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल सहारनपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ है। विभिन्न जिलों के व्यापारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। विभाग को संदेह है कि यह एक संगठित गिरोह का काम है, जो अलग-अलग स्थानों से संचालित होकर टैक्स सिस्टम में सेंध लगा रहा था।
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साइबर थाना पुलिस इस मामले में डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच कर रही है। वहीं राज्य कर विभाग फर्मों के पंजीकरण, उनके द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न, बिलिंग पैटर्न और इनवॉइस के मिलान में जुटा है। कई मामलों में एक ही पते पर दर्जनों फर्मों के पंजीकरण के संकेत भी मिले हैं, जिससे शक और गहरा गया है।
सूत्रों के अनुसार, फर्जी कंपनियों के जरिए पहले कागजों में भारी मात्रा में माल की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी और फिर उसी आधार पर ITC क्लेम कर लिया जाता था। इस प्रक्रिया में टैक्स का भुगतान किए बिना ही क्रेडिट हासिल कर लिया जाता था, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंचता रहा।
जांच एजेंसियों ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। संदिग्ध फर्मों और कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दस्तावेजों की गहन जांच और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर टैक्स प्रणाली में फर्जीवाड़े की गंभीरता को उजागर करता है, जहां तकनीकी खामियों और दस्तावेजों के दुरुपयोग के जरिए बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों पर रोक लगाई जा सके।
