नई दिल्ली: रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने आरोपी अमिताभ झुनझुनवाला की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। अदालत ने ईडी को अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त के लिए निर्धारित की है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत दर्ज जांच से संबंधित है, जिसमें करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और बैंक ऋण धोखाधड़ी की जांच जारी है।
अदालती कार्यवाही के दौरान अमिताभ झुनझुनवाला ने नियमित जमानत की मांग करते हुए अपनी याचिका दायर की। इस बीच, ईडी द्वारा उनके सहित 54 अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर अभियोजन शिकायत (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) भी अदालत के विचाराधीन है। विशेष न्यायाधीश ने ईडी को नोटिस जारी कर जमानत याचिका पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा। ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी।
Only 10 Days Remain: Register Now for FutureCrime Summit 2026 at Bharat Mandapam
झुनझुनवाला की ओर से अधिवक्ता सौजन्या शंकरण और अनमोल सचान ने अदालत में पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी विभिन्न चिकित्सीय समस्याओं से जूझ रहे हैं और इसी आधार पर उन्हें जमानत प्रदान की जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने फिलहाल जमानत याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने के प्रश्न पर भी प्रारंभिक बहस सुनी। यह अभियोजन शिकायत, जिसे सामान्य तौर पर आरोपपत्र के समकक्ष माना जाता है, पीएमएलए के तहत कई व्यक्तियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं के खिलाफ दायर की गई है। अदालत फिलहाल शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है ताकि यह तय किया जा सके कि आरोपों पर संज्ञान लिया जाए या नहीं।
ईडी ने 12 जून को अमिताभ झुनझुनवाला, अमित बापना तथा 53 अन्य आरोपियों और विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थाओं के खिलाफ यह अभियोजन शिकायत दायर की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रिलायंस समूह की कंपनियों से जुड़े थे और उन्हें अप्रैल 2026 में कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि मामले में वित्तीय अनियमितताओं से उत्पन्न कथित अपराध की आय (Proceeds of Crime) को छिपाने और उसके उपयोग की जांच की जा रही है।
ईडी के अनुसार, जांच का केंद्र बिंदु यह पता लगाना है कि कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से प्राप्त धन का किस प्रकार उपयोग किया गया और क्या उसे विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया। हालांकि एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम परीक्षण अभी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना बाकी है और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने तथा आरोपों का खंडन करने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद विशेष अदालत सबसे पहले उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करती है और यह तय करती है कि आरोपों पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। इसी के समानांतर जमानत याचिकाओं पर भी अलग से विचार किया जाता है, जिसमें आरोपों की प्रकृति, जांच की स्थिति, उपलब्ध साक्ष्य, आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति, गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
फिलहाल अदालत ने न तो जमानत याचिका पर कोई अंतिम आदेश पारित किया है और न ही अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने के प्रश्न पर निर्णय दिया है। दोनों मुद्दे न्यायिक विचाराधीन हैं और अब अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, जब ईडी अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगी। इसके बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया और मामले की दिशा तय करेगी।
