RBI की वेबसाइट पर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 6.1 करोड़ साइबर हमले हुए, सभी विफल। AI आधारित सुरक्षा ने बढ़ते खतरे रोके। स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन और कार्ड टोकनाइजेशन से वित्तीय इकोसिस्टम मजबूत। साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती।

तीन महीनों में 6.1 करोड़ साइबर हमले नाकाम: RBI ने AI सुरक्षा कवच से बढ़ते खतरे को रोका

Team The420
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तेजी से बदलते साइबर खतरे के दौर में Reserve Bank of India (RBI) ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हुए 6.1 करोड़ से अधिक साइबर हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया। यह आंकड़ा न सिर्फ हमलों की बढ़ती तीव्रता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थाओं में से एक लगातार साइबर अपराधियों के निशाने पर है। इसके बावजूद, मजबूत सुरक्षा ढांचे के चलते कोई भी हमला सिस्टम को भेद नहीं सका।

यह जानकारी हाल ही में एक उद्योग कार्यक्रम के दौरान RBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साझा की। उन्होंने बताया कि बीते महीनों में साइबर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अप्रैल–जून 2025 में जहां लगभग 1.9 करोड़ हमले दर्ज किए गए थे, वहीं जुलाई–सितंबर में यह संख्या बढ़कर 3.1 करोड़ हो गई। इसके बाद अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में यह आंकड़ा दोगुना होकर 6.1 करोड़ तक पहुंच गया।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि हमलावर अब अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं। छोटे हैकर्स से लेकर संगठित साइबर गिरोह तक, सभी वित्तीय संस्थानों—खासकर केंद्रीय बैंकों—को निशाना बना रहे हैं, क्योंकि यहां संवेदनशील वित्तीय डेटा और महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचा मौजूद होता है।

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इतनी बड़ी संख्या में हमलों के बावजूद RBI की सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह प्रभावी रही। अधिकारियों के अनुसार, उन्नत फायरवॉल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और लगातार अपडेट किए जा रहे सुरक्षा तंत्र ने सभी हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों को भी अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति में शामिल करना शुरू कर दिया है।

अधिकारियों ने बताया कि AI टूल्स की मदद से संदिग्ध गतिविधियों के पैटर्न को पहचानना, हमलों के स्रोत का पता लगाना और संभावित खतरों को पहले ही ब्लॉक करना संभव हो रहा है। यह पारंपरिक सुरक्षा मॉडल से एक बड़ा बदलाव है, जहां अब सिस्टम केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि हमलों का अनुमान लगाकर पहले से ही उन्हें रोकने की क्षमता विकसित कर रहा है।

RBI सिर्फ अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भुगतान और बैंकिंग इकोसिस्टम को भी मजबूत तकनीकी और नियामकीय उपाय अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। उद्योग से जुड़े हितधारकों को नई तकनीकों को अपनाने और सुरक्षा मानकों को बढ़ाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस दिशा में ‘स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन’ और ‘कार्ड टोकनाइजेशन’ जैसे कदम अहम साबित हुए हैं। शुरुआत में इनका विरोध हुआ, लेकिन अब ये बड़े स्तर पर सफल हो चुके हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लाखों ऑटोमेटेड पेमेंट मैनडेट्स 99% से अधिक सफलता दर के साथ प्रोसेस हो रहे हैं। वहीं, कार्ड टोकनाइजेशन के जरिए अरबों ट्रांजैक्शन सुरक्षित तरीके से किए जा रहे हैं, जिससे कार्ड डिटेल्स के दुरुपयोग का खतरा कम हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI का अनुभव वैश्विक स्तर पर बढ़ते साइबर खतरों की झलक भी देता है। हमलावर अब AI, ऑटोमेशन और डिस्ट्रीब्यूटेड नेटवर्क का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर हमले कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक सुरक्षा उपाय चुनौती में आ गए हैं।

ऐसे में RBI का AI-आधारित सुरक्षा सिस्टम की ओर बढ़ना समय की मांग माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की साइबर सुरक्षा पूरी तरह ऐसे स्मार्ट सिस्टम्स पर निर्भर करेगी, जो रियल-टाइम में खतरों को पहचानकर तुरंत कार्रवाई कर सकें।

आने वाले समय में RBI अपनी डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करने के साथ-साथ पूरे वित्तीय तंत्र को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने की दिशा में काम करता रहेगा। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि AI और API जैसी तकनीकें न केवल साइबर सुरक्षा, बल्कि फ्रॉड डिटेक्शन, ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट और ग्राहक सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाएंगी।

तेजी से बदलते साइबर खतरे के बीच RBI का यह कदम सतर्कता और तकनीकी नवाचार की जरूरत को रेखांकित करता है। जहां एक ओर 6.1 करोड़ हमलों को विफल करना मजबूत सुरक्षा का संकेत है, वहीं यह भी साफ है कि आने वाले समय में साइबर जोखिम और बढ़ने वाले हैं, जिनसे निपटने के लिए लगातार अपडेट और निगरानी जरूरी होगी।

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