रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में हज यात्रा कराने के नाम पर ₹12.17 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। जिला पूर्ति कार्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारी जमील अहमद को निजी व्यवस्था से हज यात्रा कराने का भरोसा देकर आरोपियों ने उनकी जीवनभर की जमा पूंजी, पेंशन की रकम और अन्य मूल्यवान सामान हड़प लिया। बाद में जब यात्रा के लिए दिए गए फ्लाइट टिकट फर्जी निकले तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मिलक क्षेत्र के गांव खाताकलां निवासी जमील अहमद ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वह नियमित रूप से नोदरा चौकी स्थित मोती मस्जिद में नमाज अदा करने जाते थे। इसी दौरान उनकी पहचान मस्जिद के इमाम ख्वाजा अहमद कारी और उसके साथी इमरान से हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सरकारी कोटे से उनका और उनकी पत्नी फूल बी का हज यात्रा के लिए चयन नहीं हो सका है। इस पर दोनों आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि वे निजी व्यवस्था के माध्यम से दोनों को हज यात्रा पर भेज देंगे और इसके लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने धीरे-धीरे उनका विश्वास जीत लिया और यात्रा की तैयारियों के नाम पर अलग-अलग समय पर बड़ी रकम की मांग शुरू कर दी। जमील अहमद ने अपनी जीवनभर की बचत, पेंशन से प्राप्त धनराशि, जमीन बेचकर मिले पैसे तथा पत्नी के सोने के कुंडल बेचकर जुटाई गई रकम आरोपियों को सौंप दी। मई और जून 2026 के बीच उन्होंने करीब ₹9 लाख नकद आरोपियों को दिए।
आरोप है कि आरोपियों ने सामाजिक परंपराओं का भी फायदा उठाया। उनके कहने पर 14 मई को हज यात्रा पर रवाना होने से पहले गांव और रिश्तेदारों के लिए दावत आयोजित की गई, जिस पर करीब ₹2.50 लाख खर्च हुए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने पीड़ित के घर से लगभग ₹17 हजार कीमत का एक बकरा और करीब ₹50 हजार मूल्य का अन्य सामान भी अपने साथ ले लिया। इस तरह नकदी, दावत और सामान सहित कुल नुकसान ₹12.17 लाख तक पहुंच गया।
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पीड़ित ने बताया कि यात्रा की तारीख नजदीक आने पर आरोपियों ने उनके बेटे के व्हाट्सएप पर फ्लाइट टिकट भेजे। कुछ समय बाद उन्होंने यह कहकर टिकट डिलीट कर दिए कि बुकिंग निरस्त हो गई है और नई टिकट जारी की जाएगी। इसके बाद यात्रा की तारीख कई बार बदली गई। लगातार हो रही देरी और बदलते बहानों से संदेह होने पर उन्होंने एक कैफे पर टिकटों की जांच कराई। जांच में पता चला कि टिकट पूरी तरह फर्जी थे और किसी वैध बुकिंग से उनका कोई संबंध नहीं था।
फर्जी टिकट का खुलासा होने के बाद जमील अहमद ने आरोपियों से अपने रुपये और पासपोर्ट वापस मांगे। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उनके साथ गाली-गलौज की गई और पुलिस में फंसाने की धमकी भी दी गई। खुद को ठगा महसूस करने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों से की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत की जांच कराई। इसके बाद एसपी अनुराग सिंह के निर्देश पर शहर कोतवाली पुलिस ने ख्वाजा अहमद कारी और इमरान के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस का कहना है कि आरोपों की जांच की जा रही है तथा लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला धार्मिक यात्रा के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की ओर भी संकेत करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हज, उमराह या अन्य धार्मिक यात्राओं के लिए केवल अधिकृत संस्थाओं और सत्यापित ट्रैवल ऑपरेटरों के माध्यम से ही आवेदन और भुगतान करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के मौखिक आश्वासन या निजी व्यवस्था के नाम पर बड़ी रकम देने से पहले सभी दस्तावेजों, टिकटों और पंजीकरण की स्वतंत्र रूप से जांच करना आवश्यक है, ताकि इस प्रकार की आर्थिक ठगी से बचा जा सके।
