श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी पड़ताल तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जुलाई को दूसरी SIT का गठन किया था और उसे जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। समयसीमा पूरी होने के करीब आने के साथ ही रामजन्मभूमि परिसर में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ का सिलसिला तेज कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन एक से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, SIT अब मंदिर परिसर में चढ़ावे और प्रसाद से जुड़े कामकाज की प्रक्रिया को समझने के साथ संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों की भी पड़ताल कर रही है। पिछले पांच दिनों में पूछताछ की गति बढ़ाई गई है। ट्रस्ट की ओर से बनाए गए विभिन्न विभागों के प्रमुखों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। शुक्रवार को प्रसाद वितरण से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की गई। माना जा रहा है कि इस चरण के साथ परिसर में कार्यरत अधिकांश संबंधित लोगों से पूछताछ पूरी होने के करीब है।
दूसरी SIT का गठन पहली जांच के बाद सामने आए सवालों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत किया गया है। टीम की अध्यक्षता लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस कर रहे हैं। इसमें अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन वर्मा, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर और बाराबंकी में तैनात एडिशनल एसपी रितेश कुमार शामिल हैं। जांच को वित्तीय और तकनीकी आधार देने के लिए फोरेंसिक ऑडिटर तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत विशेषज्ञों को भी टीम के साथ जोड़ा गया है।
SIT की जांच केवल परिसर में मौजूद कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, टीम ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से भी अतिरिक्त जानकारी लेने के लिए फोन पर बातचीत की है। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा अयोध्या जिले में ही मौजूद बताए जा रहे हैं, जबकि पदमुक्त होने के बाद गोपाल राव जिले से बाहर चले गए हैं। सूत्रों का कहना है कि वह पिछले करीब 15 दिनों से रामजन्मभूमि परिसर में दिखाई नहीं दिए हैं।
जांच टीम चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली को भी समझने का प्रयास कर रही है। वित्तीय विशेषज्ञों की मौजूदगी में लेनदेन और रिकॉर्ड से संबंधित पहलुओं की जांच किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की रकम और सामग्री के प्रबंधन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं और यदि कहीं कोई अनियमितता हुई तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
सूत्रों के मुताबिक, SIT के अधिकारी प्रतिदिन देर शाम करीब 10 बजे वर्चुअल बैठक भी कर रहे हैं। इन बैठकों में दिनभर हुई पूछताछ, सामने आए तथ्यों और आगे की जांच की दिशा की समीक्षा की जाती है। डीआईजी, एसएसपी और संबंधित क्षेत्राधिकारी रोजाना की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। इस व्यवस्था के जरिए टीम के वरिष्ठ अधिकारी जांच की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रख रहे हैं और अगले दिन की कार्रवाई की रणनीति तय की जा रही है।
रामजन्मभूमि परिसर में विभागीय स्तर पर भी कुछ बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, परिसर में विभिन्न विभागों के कुछ अधिकारियों के पटल बदले गए हैं। हालांकि, इन बदलावों का सीधे तौर पर SIT की जांच से संबंध है या यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी SIT की जांच ऐसे समय में अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है जब रिपोर्ट सौंपने की निर्धारित समयसीमा समाप्त होने वाली है। इसलिए टीम अब बयानों, दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड को एक साथ रखकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। विशेषज्ञों की सहायता से रिकॉर्ड की जांच और कर्मचारियों के बयानों के मिलान के जरिए कथित चढ़ावा चोरी मामले में जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
फिलहाल SIT की ओर से जांच के निष्कर्षों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आए और किन लोगों की भूमिका पर क्या निष्कर्ष निकाला गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चल रही इस जांच पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।
