रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम पर डीपफेक वीडियो बनाकर फर्जी निवेश योजना चलाई जा रही है, जिसमें रोजाना ₹80,000 कमाई का झांसा दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री के नाम पर डीपफेक जाल: ₹80,000 रोज कमाई का झांसा, निवेशकों को बना रहे शिकार

Team The420
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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर एक बड़े साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को फर्जी निवेश योजना में फंसाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के जरिए निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, यह डीपफेक वीडियो किसी आधिकारिक सरकारी संबोधन की तरह तैयार किया गया है। इसमें राष्ट्रीय प्रतीक, सबटाइटल्स और प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह पूरी तरह असली प्रतीत होता है। वीडियो में दावा किया गया है कि ₹22,000 का निवेश कर रोजाना ₹80,000 तक कमाए जा सकते हैं और हर महीने लाखों रुपये की आमदनी संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये दावे पूरी तरह अवास्तविक और भ्रामक हैं।

इस ठगी को खतरनाक बनाने वाली बात इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव है। वीडियो में मौजूदा तारीख को डायनामिक तरीके से दिखाया जाता है, जिससे तत्काल निर्णय लेने का दबाव बनता है। साथ ही “Today’s Profit” और “Monthly Income” जैसे लाइव काउंटर दिखाए जाते हैं, जो लगातार बढ़ते हुए नजर आते हैं और निवेशकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि सिस्टम सच में काम कर रहा है।

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विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वीडियो में कई बड़े वित्तीय संस्थानों के लोगो भी दिखाए गए हैं, जैसे State Bank of India, HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, Bank of Baroda, Punjab National Bank और Infosys। हालांकि इन संस्थानों का इस योजना से कोई संबंध नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक लोगों का भरोसा जीतने के लिए जानबूझकर अपनाई जाती है।

जांच में सामने आया है कि यह ठगी एक संगठित दो-स्तरीय प्रक्रिया के तहत की जाती है। पहले सोशल मीडिया पर टारगेटेड विज्ञापन या वायरल पोस्ट के जरिए लोगों तक यह वीडियो पहुंचाया जाता है, खासकर रिटायर्ड लोगों, नौकरीपेशा वर्ग और नए निवेशकों को निशाना बनाया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता है, उसे एक फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है, जो असली निवेश प्लेटफॉर्म जैसी दिखती है।

इसके बाद यूजर से नाम, मोबाइल नंबर और PAN जैसी निजी जानकारी मांगी जाती है। फिर ₹22,000 के आसपास की शुरुआती रकम UPI या बैंक ट्रांसफर के जरिए जमा करने को कहा जाता है, जो फर्जी खातों में चली जाती है।

भुगतान के बाद यूजर को एक फर्जी डैशबोर्ड दिखाया जाता है, जिसमें भारी मुनाफा दिखाया जाता है। लेकिन जब वह पैसा निकालने की कोशिश करता है, तो टैक्स, वेरिफिकेशन फीस या अन्य चार्ज के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं। अंत में निकासी बंद कर दी जाती है और वेबसाइट गायब हो जाती है।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में लोगों ने ₹50,000 से लेकर ₹2 करोड़ से ज्यादा तक गंवाए हैं। हाल के समय में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह “सोशल इंजीनियरिंग” का क्लासिक उदाहरण है, जहां अपराधी लोगों के भरोसे और लालच का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाते हैं। वे सलाह देते हैं कि किसी भी ऐसे निवेश प्रस्ताव से सावधान रहें, जो असामान्य या गारंटीड रिटर्न का दावा करता हो।

लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, अपनी निजी जानकारी साझा न करें और ऐसे वीडियो को तुरंत रिपोर्ट करें। यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए और शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

यह घटना दिखाती है कि कैसे नई तकनीक का दुरुपयोग कर अपराधी ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में डिजिटल जागरूकता, सतर्कता और समय पर कार्रवाई ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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