बेंगलुरु। विदेश में बेहतर नौकरी पाने का सपना दिखाकर ठगी करने वाले गिरोहों का एक और मामला सामने आया है, जहां बेंगलुरु के एक अकाउंटेंट को ₹4.3 लाख का चूना लगाकर उसे आर्मेनिया में बिना नौकरी के छोड़ दिया गया। यह घटना बताती है कि किस तरह फर्जी वीजा कंसल्टेंसी और प्लेसमेंट एजेंसियां युवाओं की विदेश में करियर बनाने की इच्छा का फायदा उठा रही हैं।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित, जो लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अनुभव रखने वाला डिप्लोमा धारक है, सितंबर 2025 में बेहतर अवसरों की तलाश में बेंगलुरु के राजाजीनगर स्थित एक कंसल्टेंसी के संपर्क में आया था। कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि ने उसे अमेरिका में लॉजिस्टिक्स जॉब दिलाने का भरोसा दिया और वीजा प्रोसेसिंग, यात्रा और रहने की व्यवस्था सहित पूरी सहायता का आश्वासन दिया।
इन दावों पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल ₹4.3 लाख कंसल्टेंसी को दे दिए। उसे बताया गया कि उसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और वह जल्द ही अमेरिका में नौकरी शुरू करेगा। लेकिन जब वह विदेश पहुंचा, तो उसे Yerevan, Armenia भेज दिया गया, जहां उसे पता चला कि उसके लिए कोई नौकरी की व्यवस्था ही नहीं की गई थी।
इतना ही नहीं, उसे जिस लॉजिस्टिक्स जॉब का वादा किया गया था, उसके बजाय कम वेतन वाली निर्माण (construction) से जुड़ी नौकरी का प्रस्ताव दिया गया, जो पूरी तरह अलग था। अनजान देश में बिना किसी सहायता के फंसे पीड़ित को अंततः अपने खर्च पर भारत लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बाद में पीड़ित ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने बताया कि कैसे उसे झूठे वादों के जरिए ठगा गया। शिकायत के आधार पर अब कंसल्टेंसी के कामकाज और उसकी संभावित भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से कहानी गढ़कर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। आकर्षक नौकरी और विदेश में बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर भरोसा जीता गया और फिर उससे बड़ी रकम वसूल ली गई। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को निर्णय लेने पर मजबूर किया जाता है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। देशभर में इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां फर्जी एजेंसियां विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलती हैं और बाद में उन्हें बेसहारा छोड़ देती हैं।
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साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार पीड़ितों को ऐसे देशों में भेजा जाता है जहां प्रवेश प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है, ताकि पूरे मामले को वास्तविक दिखाया जा सके, जबकि असली नौकरी कहीं होती ही नहीं है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, इस तरह के मामलों में “सोशल इंजीनियरिंग” का इस्तेमाल किया जाता है। ठग पहले विश्वास पैदा करते हैं और फिर फर्जी दस्तावेजों व पेशेवर बातचीत के जरिए अपने झांसे को विश्वसनीय बनाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी कंसल्टेंसी या जॉब ऑफर की सत्यता की जांच किए बिना भुगतान न करें।
यह मामला वीजा कंसल्टेंसी और विदेशी प्लेसमेंट एजेंसियों की निगरानी में खामियों को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में सख्त नियम, लाइसेंसिंग और पारदर्शिता जरूरी है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर किसी भी एजेंसी पर आंख बंद कर भरोसा न करें। कंपनी की विश्वसनीयता की जांच करें, ऑफर लेटर की पुष्टि करें और बिना पुख्ता दस्तावेज के बड़ी रकम का भुगतान करने से बचें।
यदि कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और अन्य लोगों को भी ऐसे जाल में फंसने से बचाया जा सके।
फिलहाल, इस मामले की जांच जारी है और कंसल्टेंसी से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संचार रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।
