चंडीगढ़ (पंजाब): पंजाब पुलिस ने फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मामले में सात कथित मुख्य संचालकों और 28 अभ्यर्थियों समेत कुल 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी परीक्षा में नकल कराने के लिए छोटे आकार के ब्लूटूथ डिवाइस, पेन कैमरा और रियल टाइम उत्तर पहुंचाने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे।
यह परीक्षा बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) की ओर से फार्मेसी अफसर के 454 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। इसमें लगभग 7,000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा की निगरानी के लिए उड़न दस्तों की तैनाती की गई थी, जिन्होंने विभिन्न केंद्रों पर जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया।
परीक्षा केंद्रों से बरामद हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों के पास से छोटे वायरलेस उपकरण बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थी इन उपकरणों को पगड़ी, मोजे और अन्य कपड़ों के अंदर छिपाकर परीक्षा कक्ष में ले गए थे। टीम ने कुल 27 बैटरी संचालित वायरलेस डिवाइस जब्त किए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह ने परीक्षा में बैठे उम्मीदवारों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। अधिकारियों के अनुसार, बरामद उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पेन कैमरे से भेजे गए प्रश्न पत्र, कंट्रोल रूम से दिए गए उत्तर
जांच में आरोप है कि फिरोजपुर में परीक्षा दे रहे एक अभ्यर्थी आयुष ने छिपे हुए पेन कैमरे की मदद से प्रश्न पत्र स्कैन किया। इसके बाद कथित तौर पर प्रश्न पत्र व्हाट्सऐप के जरिए हरियाणा के भिवानी निवासी साजन तक भेजा गया।
पुलिस के अनुसार, साजन ने प्रश्न पत्र को आगे एक अन्य आरोपी दीपक तक पहुंचाया, जो फरीदकोट में बनाए गए कथित अस्थायी कंट्रोल रूम से जुड़ा था। आरोप है कि वहां से मनजीत सिंह और दीपक ने वायरलेस डिवाइस के माध्यम से परीक्षा कक्ष में बैठे अभ्यर्थियों को वास्तविक समय में उत्तर बताए।
लाखों रुपये लेकर सफलता की गारंटी का आरोप
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और उम्मीदवारों से परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर बड़ी रकम वसूलता था। आरोप है कि अभ्यर्थियों से ₹3.5 लाख से ₹13 लाख तक की राशि ली गई थी।
कुछ उम्मीदवारों द्वारा कथित तौर पर आरोपियों को भविष्य की तारीख वाले चेक भी सुरक्षा के तौर पर दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब गिरोह के वित्तीय लेन-देन और अन्य जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पेपर लीक नहीं, रियल टाइम नकल का मामला
पुलिस जांच में अब तक प्रश्न पत्र लीक होने या किसी सरकारी अधिकारी की संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, कथित गड़बड़ी परीक्षा शुरू होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा के दिन कुछ आरोपी फरीदकोट-कटपुतली मार्ग स्थित एक होटल में एकत्र हुए थे, जहां से कथित रूप से विशेष वायरलेस उपकरण उम्मीदवारों तक पहुंचाए गए।
साइबर विशेषज्ञ ने जताई चिंता
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल अब केवल ऑनलाइन धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए भी गंभीर चुनौती बन रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना, उपकरणों की फोरेंसिक जांच और पूरे नेटवर्क की वित्तीय जांच बेहद जरूरी होती है।
जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश
पुलिस ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से गिरोह के सात कथित मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। वहीं, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी जारी है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। भर्ती प्रक्रिया को लेकर अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
