पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई के नाम पर करीब 70 छात्रों से लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक निजी संस्थान ने खुद को कलिंगा यूनिवर्सिटी से संबद्ध और फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग की फ्रेंचाइजी बताकर छात्रों को प्रवेश दिया। इसके लिए कथित तौर पर संबद्धता से जुड़े दस्तावेज भी दिखाए गए। मामला सामने आने के बाद विश्रामबाग पुलिस ने संस्थान के संचालक समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रथमेश अशोकचंद राऊत (26) और सचिन भीमराव बोराटे (42) के रूप में हुई है। राऊत पुणे के पुनावले क्षेत्र का रहने वाला है, जबकि बोराटे डोंबिवली का निवासी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, राऊत पुणे स्थित संस्थान का संचालक था, जबकि बोराटे फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग से जुड़ा संचालक बताया गया है।
इंटरनेट पर कॉलेज की जानकारी मिलने के बाद किया संपर्क
मामले की शिकायत एक अभिभावक ने पुलिस से की। शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी ने 12वीं कक्षा के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई करने की इच्छा जताई थी। परिवार को इंटरनेट के माध्यम से फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद कॉलेज से संपर्क करने पर उन्हें पुणे बुलाया गया।
आरोप है कि पुणे में उनकी मुलाकात प्रथमेश राऊत से हुई। उसने खुद को फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग के पुणे स्थित अध्ययन केंद्र का प्रमुख बताया। कथित तौर पर उसने संस्थान के कलिंगा यूनिवर्सिटी से संबद्ध होने से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। इन दस्तावेजों और दी गई जानकारी पर भरोसा करते हुए छात्रा का 17 जून 2026 को संस्थान में प्रवेश कराया गया। शुरुआत में परिवार की ओर से ₹10,000 शुल्क जमा किया गया।
इसके बाद 21 जुलाई से कॉलेज की नियमित कक्षाएं शुरू हुईं। शुरुआती दिनों में छात्रों और अभिभावकों को किसी बड़ी अनियमितता की जानकारी नहीं थी। हालांकि, कुछ ही समय बाद कॉलेज की संबद्धता को लेकर सवाल उठने लगे।
छात्रों को बताया गया- दूसरी यूनिवर्सिटी से होगी संबद्धता
मामले में नया मोड़ 3 अगस्त को आया, जब एक छात्रा ने अपने परिवार को फोन कर बताया कि कॉलेज को किसी दूसरी यूनिवर्सिटी से संबद्ध कराने की बात कही जा रही है। इसके बाद अभिभावकों ने संस्थान के संचालक से संपर्क किया। आरोप है कि शुरुआत में उन्हें स्पष्ट जानकारी देने के बजाय टालमटोल वाले जवाब दिए गए।
इसके बाद छात्रा के अभिभावकों ने उसके साथ पढ़ने वाले अन्य विद्यार्थियों के परिवारों से संपर्क किया। जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में अभिभावक स्वयं कॉलेज पहुंचे। वहां कथित तौर पर उन्हें पता चला कि पुणे में संस्थान की संबद्धता को लेकर फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग के साथ विवाद हो गया था और संबद्धता समाप्त किए जाने की बात सामने आई थी।
फीस और मूल दस्तावेज लौटाने से कथित इनकार
मामले की जानकारी मिलने के बाद करीब 70 छात्रों के अभिभावकों ने कॉलेज प्रबंधन से जमा की गई फीस वापस करने और छात्रों के मूल दस्तावेज लौटाने की मांग की। साथ ही विद्यार्थियों को दूसरे संस्थान में प्रवेश दिलाने के लिए स्थानांतरण प्रमाणपत्र देने को कहा गया।
आरोप है कि प्रथमेश राऊत ने फीस, मूल दस्तावेज और स्थानांतरण प्रमाणपत्र वापस करने से इनकार कर दिया। इसके बाद सभी 70 छात्रों के अभिभावक पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने संस्थान में पहुंचकर छात्रों की फीस वापस करने और उनकी मांग के अनुसार स्थानांतरण प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने को कहा। कथित तौर पर इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से सहयोग नहीं किया गया।
पुलिस जांच में सामने आएगा पूरा वित्तीय रिकॉर्ड
इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रों से कुल कितनी राशि ली गई, कितने विद्यार्थियों से शुल्क वसूला गया और रकम किन खातों में जमा हुई। संबद्धता से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर छात्रों को दिखाई गई यूनिवर्सिटी संबद्धता और फ्रेंचाइजी से संबंधित दस्तावेज किसने तैयार किए और प्रबंधन में शामिल अन्य लोगों की इसमें क्या भूमिका थी। इसके अलावा छात्रों के मूल प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज कहां रखे गए हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।
मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ कथित धोखाधड़ी की कुल रकम और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस पूरे घटनाक्रम और छात्रों से लिए गए पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
