पुणे। पुणे में एक ही दिन में सामने आए साइबर धोखाधड़ी, निवेश घोटाले, आपराधिक विश्वासघात और ट्रैवल फ्रॉड के सात मामलों ने वित्तीय अपराधों के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। विभिन्न थानों में दर्ज इन मामलों में कुल नुकसान ₹3.72 करोड़ से अधिक बताया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन, व्हाट्सएप निवेश समूहों, नकली बैंकिंग प्रतिनिधियों और झूठे ट्रैवल ऑफरों का सहारा ले रहे हैं।
सबसे बड़ा नुकसान कटराज क्षेत्र के 53 वर्षीय निवासी हेमंत जयंत जाधव को हुआ, जिन्हें कथित तौर पर एक फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग एप्लिकेशन के जरिए ₹63.84 लाख की चपत लगी। जांच के अनुसार, जाधव को मोबाइल फोन पर एक लिंक प्राप्त हुआ, जिसके माध्यम से उन्होंने “DMA-IIFL” नामक एप्लिकेशन डाउनलोड किया। आरोप है कि ठगों ने उन्हें शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया और अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में कथित लाभ दिखाकर उनका भरोसा जीता गया, लेकिन जब उन्होंने निवेश की गई राशि और मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है।
एक अन्य बड़े मामले में तीन निवेशकों को कथित निवेश घोटाले में कुल ₹2.62 करोड़ का नुकसान हुआ। शिकायत 63 वर्षीय किशोर बापुराव गोरडे द्वारा दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर जांच एजेंसियों ने संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि मामले में और भी निवेशकों के प्रभावित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
धायरी क्षेत्र में 67 वर्षीय शिरीष सदाशिव जोशी को एक फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग नेटवर्क ने कथित तौर पर ₹23.39 लाख की चपत लगाई। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संचालित हो रहा था। ग्रुप में नियमित रूप से निवेश सलाह, बाजार विश्लेषण और कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जाते थे ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सके। जांचकर्ताओं का कहना है कि ऐसे समूहों के जरिए विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और नए निवेशकों को निशाना बनाया जा रहा है।
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एक अन्य साइबर धोखाधड़ी मामले में 66 वर्षीय सुरेंद्रसिंह सेवासिंह गुरुदत्ता को ₹11.80 लाख का नुकसान हुआ। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया और सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग) तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्हें वित्तीय लेनदेन के लिए राजी कर लिया।
इन मामलों के अलावा कोंढवा क्षेत्र में आपराधिक विश्वासघात का मामला भी दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने परिचित को ₹7 लाख नकद और एक मोटरसाइकिल सौंपी थी, लेकिन आरोपी ने न तो रकम बैंक खाते में जमा की और न ही वाहन लौटाया। इसके बाद वह कथित तौर पर फरार हो गया।
शहर में दो ट्रैवल फ्रॉड के मामले भी सामने आए। एक मामले में जम्मू-कश्मीर के लिए रियायती पारिवारिक हवाई टिकट दिलाने का वादा कर ₹63,940 लेने के बावजूद टिकट उपलब्ध नहीं कराए गए। दूसरे मामले में दुबई पारिवारिक यात्रा के नाम पर ₹2.05 लाख लेने के बाद टूर रद्द कर दिया गया और पूरी राशि वापस नहीं की गई।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि निवेश संबंधी साइबर ठगी में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी एप्लिकेशन और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, अपराधी पहले नकली मुनाफा दिखाकर विश्वास जीतते हैं और फिर पीड़ितों से लगातार अधिक धन निवेश करवाते हैं।
जांच एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता की पुष्टि किए बिना पैसा न लगाएं, अज्ञात लिंक से एप्लिकेशन डाउनलोड न करें और सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से मिलने वाले आकर्षक वित्तीय प्रस्तावों से सावधान रहें। अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों में डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और धन के प्रवाह की जांच जारी है तथा संबंधित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
