पटना: सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आपत्तिजनक वीडियो की कथित खरीद-बिक्री करने वाले एक कपड़ा दुकानदार को पटना साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अशोक कुमार, पालीगंज थाना क्षेत्र के धरहरा निवासी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह Telegram ग्रुप से जुड़कर आपत्तिजनक वीडियो हासिल करता था और फिर उन्हें पैसे लेकर दूसरे लोगों तक पहुंचाता था। प्रारंभिक जांच में उसके जरिए 1,200 से अधिक वीडियो की खरीद-बिक्री किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस को इस मामले में दिल्ली स्थित CCUS से इनपुट मिला था। सूचना में एक युवक द्वारा आपत्तिजनक वीडियो डाउनलोड किए जाने की जानकारी और तकनीकी लिंक उपलब्ध कराए गए थे। इसके बाद पटना साइबर थाना की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया। जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों का कनेक्शन पालीगंज के धरहरा इलाके से सामने आया, जिसके आधार पर पुलिस ने वहां छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
Telegram ग्रुप से जुड़कर शुरू किया कारोबार
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पहले पैसे देकर एक Telegram ग्रुप से जुड़ा था। इसके बाद वह दूसरे ग्रुप में भी शामिल हुआ। पुलिस के मुताबिक, इन ग्रुपों के जरिए उसे आपत्तिजनक वीडियो मिलते थे, जिन्हें वह आगे बेचने और शेयर करने का काम करता था।
जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रति वीडियो ₹20 से ₹30 तक वसूलता था। वह ग्राहकों से रकम लेने के बाद कथित तौर पर वीडियो उपलब्ध कराता या उन्हें संबंधित ग्रुप और डिजिटल माध्यमों पर अपलोड एवं शेयर करता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के संपर्क में कितने लोग थे और उसके जरिए सामग्री खरीदने वाले लोगों का नेटवर्क कितना बड़ा है।
1,200 से अधिक वीडियो की खरीद-बिक्री का खुलासा
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपी अब तक 1,200 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो की खरीद-बिक्री कर चुका था। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल डेटा, Telegram गतिविधियों और अन्य ऑनलाइन संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वह मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर वीडियो डाउनलोड करने, अपलोड करने और दूसरे लोगों के साथ साझा करने के लिए किया जाता था। फोन की तकनीकी जांच से उसके डिजिटल नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
बैंक खातों और UPI लेनदेन की जांच
पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। UPI, मोबाइल वॉलेट और अन्य डिजिटल माध्यमों से हुई रकम की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गतिविधि से आरोपी ने कुल कितनी कमाई की।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि वीडियो की खरीद के लिए आरोपी ने किन खातों या डिजिटल माध्यमों से भुगतान किया और बिक्री से प्राप्त रकम किन खातों में पहुंची। इससे कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग पर निगरानी
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निजी या आपत्तिजनक सामग्री की अवैध खरीद-बिक्री करने वाले नेटवर्क में अक्सर कई स्तर के खाते और ग्रुप शामिल होते हैं। ऐसे मामलों में केवल सामग्री साझा करने वाले व्यक्ति तक जांच सीमित रखने के बजाय भुगतान, डिजिटल उपकरणों और जुड़े हुए खातों की पूरी श्रृंखला की पड़ताल जरूरी होती है।
पटना साइबर थाना पुलिस अब बरामद मोबाइल की फोरेंसिक जांच के साथ आरोपी के डिजिटल संपर्कों और वित्तीय लेनदेन को खंगाल रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले इस गतिविधि में शामिल था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। जांच के दौरान सामने आने वाले डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
