चंडीगढ़। हरियाणा के पंचकूला नगर निगम से जुड़े ₹79.46 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले की जांच में नया मोड़ तब आया जब अदालत ने मामले में गिरफ्तार पूर्व नगर निगम आयुक्त और एक अन्य आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे थे और मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तथा कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों की बरामदगी अभी बाकी है। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
यह मामला कथित तौर पर पंचकूला नगर निगम के खाते से ₹79.46 करोड़ की राशि के अनियमित हस्तांतरण से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह प्रकरण एक बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामले से जुड़ा हुआ है, जिसमें सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय लेनदेन की कई परतों की जांच की जा रही है। मामले ने प्रशासनिक और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार हिरासत के दौरान आरोपी से विभिन्न डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ की गई। जांच में बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया, सावधि जमा (एफडी) से जुड़े लेनदेन, अन्य आरोपियों के साथ कथित संवाद और धनराशि के प्रवाह से संबंधित दस्तावेजों को सामने रखकर जवाब मांगे गए। एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन को विभिन्न माध्यमों से स्थानांतरित किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू उन वित्तीय रास्तों की पड़ताल है जिनके माध्यम से कथित रूप से राशि को आगे बढ़ाया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि धनराशि किन खातों में पहुंची, उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया और क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की फर्जी संस्थाओं या शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इसी कारण बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
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मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी की भूमिका की भी जांच जारी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किस स्तर पर किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही। अधिकारियों का मानना है कि मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए विभिन्न विभागों और संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड का मिलान किया जाना आवश्यक है।
अदालत में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड दिखाए गए, लेकिन जांच में अपेक्षित स्तर का सहयोग नहीं मिला। एजेंसी ने यह भी कहा कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और संभावित आर्थिक लाभ से जुड़ी परिसंपत्तियों की बरामदगी अभी शेष है। इसी आधार पर मामले की आगे की जांच जारी रखने की आवश्यकता बताई गई।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैंकिंग लेनदेन, ई-मेल, मोबाइल डेटा, डिजिटल संचार और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अक्सर धन के वास्तविक प्रवाह और संभावित लाभार्थियों की पहचान करने में मदद करते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां तकनीकी और वित्तीय दोनों पहलुओं की समानांतर जांच करती हैं।
मामले की पृष्ठभूमि में नगर निगम के खाते से कथित रूप से बड़ी राशि के हस्तांतरण का मुद्दा शामिल है, जिसने प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या वित्तीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था में किसी स्तर पर चूक हुई थी, जिससे इतनी बड़ी राशि का कथित दुरुपयोग संभव हो सका।
फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजी रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। अब निगाहें आगामी सुनवाई और जांच की अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
