मुंबई/रायगढ़। समुद्र में पारंपरिक मछली पकड़ने का काम करने वाला एक व्यक्ति किस तरह सुनियोजित तरीके से करोड़ों के चोरी रैकेट का मास्टरमाइंड बन गया, इसका खुलासा हालिया कार्रवाई में हुआ है। आरोप है कि रायगढ़ निवासी चंद्रकांत पाटिल ने Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के ऑफशोर प्लेटफॉर्म को निशाना बनाकर वर्षों तक महंगे उपकरण चुराए और उन्हें स्क्रैप मार्केट में बेचकर करोड़ों रुपये कमाए।
जांच में सामने आया है कि पाटिल पहले एक साधारण मछुआरा था, लेकिन वर्ष 2009 में ONGC के एक ऑफशोर इंस्टॉलेशन पर कथित चोरी की घटना के बाद उसकी गतिविधियों में बड़ा बदलाव आया। उस घटना में औद्योगिक बैटरियों और कॉपर केबल्स की भारी कीमत का अंदाजा लगने के बाद उसने इसी को अपना मुख्य ‘धंधा’ बना लिया। शुरुआती घटनाओं में ही ₹2 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था, जिसने इस पूरे रैकेट की नींव रखी।
सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद पाटिल ने धीरे-धीरे मछली पकड़ने का काम छोड़ दिया और पूरी तरह से ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर चोरी की घटनाओं में सक्रिय हो गया। वह ऐसे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाता था जहां निगरानी अपेक्षाकृत कम होती थी। आरोप है कि वह रात के समय छोटी मछली पकड़ने वाली नावों का इस्तेमाल कर प्लेटफॉर्म तक पहुंचता, वहां से बैटरी बैंक, सोलर पैनल और कॉपर वायरिंग जैसे महंगे उपकरण निकालता और फिर उन्हें तेजी से किनारे लाकर स्क्रैप बाजार में खपा देता था।
हालिया कार्रवाई में इस रैकेट की परतें तब खुलीं जब मार्च महीने में दर्ज चार अलग-अलग चोरी के मामलों में तीन आरोपियों—दत्तात्रय पाटिल (36), संतोष पाटिल (40) और विट्ठल म्हात्रे (32)—को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से करीब ₹90 लाख कीमत के 47 बैटरी बैंक बरामद किए गए, साथ ही एक नाव भी जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग ₹15 लाख बताई जा रही है। यह नाव कथित तौर पर ऑफशोर प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल की जाती थी।
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जांच एजेंसियों की टीम जब रायगढ़ के तटीय क्षेत्र में मुख्य आरोपी चंद्रकांत पाटिल को पकड़ने पहुंची, तो उसने भागने की कोशिश की। बताया जाता है कि वह एक चलती ऑटो से कूद गया और फिर पानी में छलांग लगाकर फरार होने का प्रयास किया, लेकिन पीछा कर रही टीम ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रकांत पाटिल के खिलाफ अब तक कुल 13 चोरी के मामले दर्ज हैं। इनमें से सात मामले मुंबई के येलो गेट थाने में दर्ज बताए जाते हैं, जहां उसने चार ONGC प्लेटफॉर्म को निशाना बनाकर करीब ₹1 करोड़ का नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा मंडवा, वडखल, अलीबाग, नवी पनवेल और उरण क्षेत्रों में भी उसके खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज हैं।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह कोई एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसमें स्क्रैप डीलरों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है, जो चोरी के सामान को बाजार में खपाने में मदद करते थे। अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।
पूरे मामले ने ऑफशोर प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र में स्थित इन इंस्टॉलेशनों पर निगरानी के बेहतर इंतजाम और तकनीकी सुरक्षा उपायों की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल, जांच जारी है और अधिकारियों का फोकस इस नेटवर्क के बाकी कड़ियों को जोड़ने पर है, ताकि वर्षों से चल रहे इस ‘समंदर से स्क्रैप’ के खेल का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।
