ओडिशा के क्योंझर जिले के बड़बिल में सामने आया बैंक धोखाधड़ी का मामला; ग्राहक की शिकायत पर जांच शुरू होने के बाद कोलकाता से गिरफ्तार हुआ पूर्व बैंक कर्मचारी, पूछताछ में पिता की भूमिका भी उजागर

आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर ने पिता के साथ मिलकर की ₹42 लाख की धोखाधड़ी, फर्जी चेक और हस्ताक्षरों से कई खातों से उड़ाई रकम

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By Roopa
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बड़बिल (ओडिशा): ओडिशा के क्योंझर जिले के बड़बिल में एक निजी बैंक से जुड़े ₹42 लाख की कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर जसप्रीत सिंह और उसके पिता विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने बैंक ग्राहकों के खातों से फर्जी हस्ताक्षर, नकली चेकबुक, खातों के संचालन में हेरफेर और विभिन्न ईमेल खातों के माध्यम से अवैध फंड ट्रांसफर कर लाखों रुपये का गबन किया। पुलिस का मानना है कि यह धोखाधड़ी सुनियोजित तरीके से कई खातों को निशाना बनाकर की गई।

मामले का खुलासा तब हुआ जब बड़बिल के मृणाल कॉलोनी निवासी और बैंक ग्राहक अनीता अग्रवाल ने 14 मार्च को स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बैंक खाते से लगभग ₹16 लाख की राशि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना निकाल ली गई। जांच के दौरान सामने आया कि रकम निकालने के लिए उनके हस्ताक्षरों की कथित रूप से जालसाजी की गई और फर्जी चेकों का इस्तेमाल किया गया था।

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन के दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर जसप्रीत सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस कार्रवाई तेज होने पर वह फरार हो गया, जिसके बाद उसकी तलाश के लिए विशेष प्रयास किए गए।

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित ठाकुरपुकुर इलाके में छिपा हुआ है। इसके आधार पर पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर 3 अगस्त को उसे गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा लाया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और अपने पिता विक्रम सिंह की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी।

आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस ने बड़बिल स्थित मृणाल कॉलोनी में छापेमारी कर 6 अगस्त को विक्रम सिंह को भी हिरासत में ले लिया। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धोखाधड़ी की पूरी रकम किन-किन खातों से निकाली गई तथा उसका उपयोग या हस्तांतरण किस प्रकार किया गया।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने कई ग्राहकों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों और नकली चेकबुक का सहारा लिया। साथ ही खातों के संचालन में कथित हेरफेर कर धनराशि को विभिन्न माध्यमों से स्थानांतरित किया गया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। यदि जांच में अतिरिक्त खातों से अवैध निकासी के साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।

बैंकिंग और साइबर धोखाधड़ी के मामलों में विशेषज्ञ लगातार ग्राहकों को अपने खाते की नियमित निगरानी करने, एसएमएस और ईमेल अलर्ट सक्रिय रखने तथा किसी भी संदिग्ध लेनदेन की सूचना तुरंत बैंक और पुलिस को देने की सलाह देते हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बैंकिंग प्रणाली से जुड़े कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी का समय पर पता लगाने के लिए ग्राहकों को अपने खाते के विवरण, चेकबुक के उपयोग और केवाईसी संबंधी गतिविधियों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी खाते में बिना अनुमति के लेनदेन दिखाई दे तो तत्काल बैंक को लिखित शिकायत देने और पुलिस में मामला दर्ज कराने से नुकसान की भरपाई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि ₹42 लाख की कथित धोखाधड़ी का पूरा नेटवर्क कितना व्यापक था। साथ ही अन्य संभावित पीड़ितों और किसी अतिरिक्त सहयोगी की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

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