नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में 73 वर्षीय एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कथित तौर पर फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग ऐप के जरिए ₹2.23 करोड़ की साइबर ठगी का शिकार हो गए। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित ब्रोकरेज कंपनी का प्रतिनिधि बताकर व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया और पीड़ित को एक नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए प्रेरित किया। फर्जी ऐप पर करोड़ों रुपये का काल्पनिक लाभ दिखाकर उनका विश्वास जीता गया और धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश कराई गई। जब पीड़ित ने निवेश की राशि निकालने का प्रयास किया तो अतिरिक्त शुल्क की मांग की गई। रकम वापस नहीं मिलने पर मामला साइबर क्राइम थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-21 स्थित जलवायु विहार निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी को 10 जून 2026 को व्हाट्सएप पर एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें प्रतिष्ठित ब्रोकरेज कंपनी का लोगो इस्तेमाल करते हुए ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग से आकर्षक लाभ कमाने का दावा किया गया था। संदेश और प्रस्तुत जानकारी पर विश्वास करने के बाद उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भर दिया। इसके बाद कथित तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो लेकर उनकी ऑनलाइन केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराई गई तथा उन्हें एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया, जिसे बाद में जांच में फर्जी प्लेटफॉर्म बताया गया।
जांच के अनुसार, शुरुआत में आरोपियों ने छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीत लिया। फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर निवेश लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देता रहा और खाते में लाभ की राशि तेजी से बढ़ने का दावा किया जाता रहा। पुलिस के अनुसार, ऐप में पीड़ित को ₹6 करोड़ से अधिक का काल्पनिक मुनाफा दिखाई दे रहा था, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि उनका निवेश सुरक्षित और लाभदायक है। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने अलग-अलग चरणों में बड़ी धनराशि निवेश करनी जारी रखी।
एफआईआर के अनुसार, 15 जून से 21 जुलाई के बीच पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कुल लगभग ₹2.23 करोड़ स्थानांतरित किए। बाद में जब उन्होंने अपने कथित निवेश में से ₹1.85 करोड़ निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने निकासी की अनुमति देने से पहले ₹62.51 लाख “सर्विस फीस” जमा कराने की शर्त रखी। पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने यह राशि भी जमा कर दी, लेकिन इसके बाद भी उनके खाते में कोई भुगतान नहीं आया। लगातार टालमटोल और भुगतान न मिलने पर उन्हें ठगी की आशंका हुई।
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संदेह होने पर पीड़ित 27 जुलाई को मुंबई स्थित संबंधित ब्रोकरेज कंपनी के कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने कथित रूप से उन्हें बताया कि कंपनी के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं तथा इस प्रकार के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इसके बाद पीड़ित ने नोएडा साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब उन सभी बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें कथित तौर पर धनराशि स्थानांतरित की गई थी। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और संचार माध्यमों का भी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क की पहचान की जा सके।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि हाल के महीनों में फर्जी ट्रेडिंग ऐप और निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर ठगी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके अनुसार, साइबर अपराधी अक्सर प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों और ब्रोकरेज कंपनियों के नाम, लोगो और पहचान का दुरुपयोग कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। शुरुआती चरण में नकली लाभ दिखाकर निवेश बढ़वाया जाता है और बाद में निकासी के नाम पर टैक्स, सर्विस फीस या अन्य शुल्क मांगकर अतिरिक्त रकम भी ठग ली जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को किसी भी व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से भेजे गए ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड नहीं करने चाहिए। किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत ऐप स्टोर से डाउनलोड किए गए एप्लिकेशन के माध्यम से ही करना चाहिए। निवेश से पहले यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संबंधित संस्था भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से विधिवत पंजीकृत है। यदि कोई प्लेटफॉर्म असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा करे या निकासी से पहले अतिरिक्त शुल्क जमा करने की मांग करे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। किसी भी संदिग्ध साइबर वित्तीय गतिविधि की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
