रांची: आयकर विभाग ने गुरुवार को झारखंड की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (RKSC) और उससे जुड़ी करीब दस सहयोगी कंपनियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई झारखंड, बिहार और हरियाणा के गुरुग्राम स्थित पांच परिसरों पर एक साथ की गई, जहां करीब 200 अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों की टीम वित्तीय दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और कारोबारी लेनदेन की गहन जांच में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग को कंपनी समूह द्वारा कथित रूप से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी, अघोषित आय छिपाने और बेनामी संपत्तियां अर्जित करने संबंधी सूचनाएं मिली थीं। इन्हीं इनपुट के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जांच एजेंसियों के कब्जे में लिए गए हैं, जिनका फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाएगा।
जिन स्थानों पर कार्रवाई की जा रही है उनमें रांची के कचहरी रोड स्थित पंचवटी प्लाजा में कंपनी का कार्यालय, बिहार के बेगूसराय के कृष्णा नगर स्थित कार्यालय तथा गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित सनसिटी शॉपिंग आर्केड में मौजूद कॉरपोरेट कार्यालय शामिल हैं। इनके अलावा समूह से जुड़े अन्य परिसरों पर भी जांच जारी है।
आयकर विभाग की जांच के दायरे में रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन के अलावा समूह की कई सहयोगी कंपनियां भी हैं। इनमें आयुष श्रेयस प्रॉपर्टी प्राइवेट लिमिटेड, आरकेएससीपीएल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और आरकेएससीपीएल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का ध्यान विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेनदेन, कर भुगतान, परिसंपत्तियों और खातों के मिलान पर केंद्रित है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तलाशी अभियान दो से तीन दिन तक चल सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित कर अनियमितताओं का वास्तविक स्वरूप क्या है और यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी वित्तीय सीमा कितनी है। आयकर विभाग ने फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
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रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन सड़क निर्माण, पुल, आवासीय भवन, स्टेडियम और खनन परियोजनाओं सहित विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सक्रिय रही है। कंपनी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य सरकारी एजेंसियों की कई परियोजनाओं पर काम किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी समूह का वार्षिक कारोबार हजारों करोड़ रुपये का बताया जाता है, हालांकि इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह पहला अवसर नहीं है जब कंपनी का नाम किसी जांच में सामने आया हो। मार्च 2025 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के पटना क्षेत्रीय कार्यालय के एक महाप्रबंधक को कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उस मामले में कंपनी के एक महाप्रबंधक सहित अन्य कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया था तथा तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का दावा किया गया था। उस प्रकरण की जांच अलग एजेंसियों द्वारा की गई थी।
इसके अलावा वर्ष 2018 में गिरिडीह जिले में माओवादियों तक कथित लेवी की रकम पहुंचाने के आरोप में कंपनी के एक कर्मचारी की गिरफ्तारी भी हुई थी। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उस मामले की जांच अपने हाथ में लेकर कथित तौर पर उग्रवादी नेटवर्क और ठेकेदारों के बीच समन्वय से जुड़े पहलुओं की जांच की थी।
फिलहाल आयकर विभाग की कार्रवाई जारी है और जांच एजेंसी जब्त किए गए दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। तलाशी पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर चोरी, अघोषित आय या बेनामी संपत्तियों से जुड़े आरोप किस सीमा तक प्रमाणित होते हैं और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
