नोएडा। लंबे इंतजार और कई प्रशासनिक अड़चनों के बाद Noida International Airport से उड़ान सेवाएं शुरू होने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, विभिन्न एयरलाइंस कंपनियों ने यहां से कुल 70 उड़ानें शुरू करने के प्रस्ताव दिए हैं। हालांकि, पहली उड़ान किस शहर के लिए होगी, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती चरण में बेंगलुरु और वाराणसी के लिए उड़ान शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, IndiGo समेत अन्य एयरलाइंस कंपनियां मुंबई, पटना, लखनऊ और अयोध्या जैसे प्रमुख शहरों के लिए भी उड़ान संचालन की योजना बना रही हैं। इससे यह स्पष्ट है कि एयरपोर्ट शुरू होते ही इसे एक बड़े घरेलू एविएशन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
एयरपोर्ट के निर्माण और संचालन का जिम्मा Yamuna International Airport Private Limited (यापल) के पास है, जिसे कंसेशनायर लाइसेंस दिया गया है। कंपनी इस एयरपोर्ट का संचालन 40 वर्षों तक, यानी 1 अक्टूबर 2061 तक करेगी। परियोजना के तहत यापल ने करीब ₹8,000 करोड़ का निवेश किया है, जबकि जमीन अधिग्रहण पर राज्य सरकार लगभग ₹18,000 करोड़ खर्च कर रही है।
हालांकि, उड़ान शुरू होने में देरी ने कंपनी पर वित्तीय दबाव भी बढ़ाया है। अधिकारियों के अनुसार, संचालन में देरी के चलते कंपनी को प्रतिदिन करीब ₹2 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में अब उड़ानों की शुरुआत कंपनी के लिए राहत लेकर आएगी।
उड़ान संचालन में देरी की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा मंजूरी से जुड़ी बाधाएं रहीं। एयरपोर्ट को सुरक्षा मानकों के तहत संचालन की अनुमति Bureau of Civil Aviation Security (बीसीएएस) से मिलती है, जो समय पर नहीं मिल सकी। इसका एक प्रमुख कारण यापल के तत्कालीन सीईओ की विदेशी नागरिकता थी। गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार, एयरपोर्ट संचालन से जुड़ी कंपनी का शीर्ष अधिकारी भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।
इस बाधा को दूर करने के लिए 24 अप्रैल को कंपनी ने नेतृत्व में बदलाव करते हुए अपनी मुख्य वित्त अधिकारी नीतू सामरा को नया सीईओ नियुक्त किया। इसके बाद सुरक्षा मानकों से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी की गईं और अंततः बीसीएएस से एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्लान को मंजूरी मिल गई। अब 15 जून से यहां से उड़ान सेवाएं शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
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नोएडा एयरपोर्ट की तुलना Navi Mumbai International Airport से भी की जा रही है, जहां उद्घाटन के बाद संचालन शुरू होने में देरी हुई थी। वहां भी सुरक्षा मंजूरी और ट्रायल प्रक्रियाओं में समय लगने के कारण उड़ानों की शुरुआत निर्धारित समय से बाद में हुई।
तकनीकी और संचालन संबंधी दृष्टि से देखें तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट फिलहाल एक रनवे के साथ शुरू होगा। इसकी प्रारंभिक वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ तय की गई है, जबकि एक समय में 25 विमानों को खड़ा करने की सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना के तीनों चरण पूरे होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की संभावना है, जो इसे देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल कर सकती है।
गौरतलब है कि एयरपोर्ट का उद्घाटन 28 मार्च को किया गया था और इसके बाद 45 दिनों के भीतर उड़ान शुरू करने का दावा किया गया था। हालांकि, विभिन्न प्रक्रियात्मक देरी के चलते अब उद्घाटन के करीब 79 दिनों बाद पहली उड़ान शुरू होने जा रही है।
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के यातायात दबाव को कम करेगा, बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी नई गति देगा। साथ ही, क्षेत्र में रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
फिलहाल, सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और एयरलाइंस कंपनियां अपने-अपने शेड्यूल को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। 15 जून से उड़ान सेवाएं शुरू होने के साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के एविएशन सेक्टर में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है।
