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सरकारी जेम पोर्टल से हुई गंभीर चूक: मरीजों के लिए मंगाई गई जानवरों वाली 60 हजार सिरिंज

Roopa
By Roopa
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नोएडा: गौतमबुद्ध नगर के जिला अस्पताल में सरकारी जेम पोर्टल के माध्यम से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। अस्पताल ने मरीजों के लिए जानवरों को लगाने वाली 60 हजार सिरिंज ऑर्डर कर दी थीं। यह गलती डेढ़ महीने तक किसी के ध्यान में नहीं आई। यदि इसका प्रयोग मरीजों पर किया जाता, तो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते थे।

सूत्रों के अनुसार, जेम पोर्टल पर सभी ऑर्डर की प्रक्रिया केवल एक कर्मचारी द्वारा नियंत्रित की जाती है। इस कर्मचारी के पास लॉग-इन आईडी और पासवर्ड होने के कारण, ऑर्डर सीधे सिस्टम में डाल दिया गया। डेढ़ महीने तक यह त्रुटि किसी भी स्तर पर पकड़ में नहीं आई। जब यह जानकारी सामने आई, तो स्टोर से सामान को रिसीव किए बिना ही एजेंसी को लौटा दिया गया।

सीएमएस कार्यालय में भी नहीं चली निगरानी

सूत्रों ने बताया कि कार्यवाहक सीएमएस कार्यालय में भी यह गंभीर गलती डेढ़ महीने तक नहीं पकड़ी गई। अधिकारी और कर्मचारी इसे दबाने में जुटे रहे। फार्मासिस्ट की सतर्कता के बाद ही यह प्रकरण उजागर हुआ।

कार्यवाहक सीएमएस का कहना है कि जेम पोर्टल पर लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत ऑर्डर हुआ था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सामान के बिल भुगतान से पहले चार स्तरों पर जाँच की प्रक्रिया थी, लेकिन यह त्रुटि इन सभी प्रक्रियाओं के बावजूद पकड़ में नहीं आई।

डेढ़ महीने बाद ऑर्डर रद्द, एजेंसी को चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ की एजेंसी को 25 दिसंबर 2025 को यह ऑर्डर दिया गया था। गलती उजागर होने के डेढ़ महीने बाद ही इसे जेम पोर्टल पर रद्द कराया गया। एजेंसी को इस गंभीर प्रकरण में चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने अब दबी जुबान में यह भी कहा कि एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने पर विचार किया जा सकता है।

यह स्पष्ट किया गया कि किसी मरीज को इन जानवरों वाली सिरिंज का उपयोग नहीं किया गया। यही वजह है कि कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह गलती इलाज में होती, तो मरीज की जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

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जानवरों की सिरिंज और सामान्य सिरिंज में अंतर

विशेषज्ञों के अनुसार, जानवरों की सिरिंज सामान्य चिकित्सा सिरिंज की तुलना में मोटी, लंबी और बड़ी होती हैं। यह एक बार उपयोग के लिए बनाई जाती हैं और इनकी निडिल पतली नहीं होती। यदि इसे इंसानों पर उपयोग किया जाता तो ओवरडोज या अन्य गंभीर दुष्प्रभाव की संभावना रहती।

फार्मासिस्ट ने बॉक्स खोलते ही गलती को पहचान लिया और उच्च अधिकारियों को तुरंत इसकी सूचना दी। स्टोर से ही सामान एजेंसी को लौटा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि इस पूरे मामले में मिलीभगत की संभावना भी तलाशी जा रही है।

सवालों के घेरे में अस्पताल प्रशासन

मामले की गंभीरता इस बात से भी जाहिर होती है कि जेम पोर्टल पर ऑर्डर देने के बाद किसी ने इसकी जाँच नहीं की। कार्यवाहक सीएमएस और अन्य अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचाने और मामले को दबाने में लगे रहे।

विशेषज्ञों और सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर निगरानी अत्यंत आवश्यक है। डेढ़ महीने तक चली यह त्रुटि न केवल मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा थी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी स्पष्ट प्रमाण है।

अस्पताल प्रशासन ने इसे लिपिकीय त्रुटि बताया है और दोषी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू की गई है। हालांकि, अब तक किसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सूचना नहीं मिली है।

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