नोएडा पुलिस ने सस्ते एयर टिकट, रिफंड और कैंसिलेशन के नाम पर विदेशी नागरिकों से करीब ₹10 करोड़ की कथित ठगी करने वाले साइबर कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

सस्ते एयर टिकट के नाम पर विदेशी नागरिकों से ₹10 करोड़ की ठगी: नोएडा में अंतरराष्ट्रीय साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 13 गिरफ्तार

Team The420
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उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी ट्रैवल एजेंसी और एयरलाइन टिकट बुकिंग सेवाओं के नाम पर अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों के नागरिकों को निशाना बनाता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने विदेशी नागरिकों से लगभग ₹10 करोड़ की ठगी की है। यह पूरा नेटवर्क एक अवैध कॉल सेंटर के जरिए संचालित किया जा रहा था।

जांच के अनुसार, आरोपी इंटरनेट पर आकर्षक विज्ञापन और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) तकनीकों का उपयोग कर अपनी वेबसाइटों और हेल्पलाइन नंबरों को प्रमुखता से प्रदर्शित करते थे। विदेशी नागरिक जब सस्ती उड़ानों, टिकट संशोधन या रिफंड संबंधी सेवाओं के लिए संपर्क करते थे, तब उन्हें कथित ग्राहक सेवा प्रतिनिधियों से जोड़ा जाता था। इसके बाद उनसे टिकट शुल्क, प्रोसेसिंग फीस या अन्य चार्ज के नाम पर रकम वसूली जाती थी।

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पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में एक कॉल सेंटर से विदेशों के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी की जा रही है। तकनीकी निगरानी और गोपनीय जांच के बाद छापेमारी की गई, जहां से 13 लोगों को हिरासत में लिया गया। मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, इंटरनेट उपकरण, कॉलिंग सॉफ्टवेयर और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। जांच एजेंसियां अब जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही हैं।

प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गिरोह विदेशी ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए खुद को प्रतिष्ठित ट्रैवल कंपनियों और एयरलाइन सेवा प्रदाताओं का प्रतिनिधि बताता था। कई मामलों में ग्राहकों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी भी हासिल की जाती थी। कुछ पीड़ितों को रिफंड दिलाने का झांसा दिया जाता था, जबकि कुछ को विशेष छूट वाले टिकटों का लालच देकर भुगतान कराया जाता था। भुगतान प्राप्त होने के बाद या तो टिकट जारी नहीं किए जाते थे या फिर ग्राहकों से अतिरिक्त रकम की मांग की जाती थी।

जांचकर्ताओं का मानना है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसके तार अन्य राज्यों तथा विदेशों तक फैले हो सकते हैं। बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन भुगतान चैनलों की भी जांच की जा रही है ताकि ठगी से प्राप्त धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगी अभी फरार हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के गिरोह इंटरनेट पर भरोसेमंद दिखने वाली वेबसाइटें और विज्ञापन बनाकर लोगों को फंसाते हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, साइबर ठग अब केवल बैंकिंग या निवेश धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ट्रैवल, होटल बुकिंग और एयरलाइन सेवाओं जैसे क्षेत्रों का भी बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग कर पीड़ितों में भरोसा पैदा करते हैं और फिर धीरे-धीरे उनसे वित्तीय जानकारी तथा भुगतान हासिल कर लेते हैं।

विशेषज्ञों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत वेबसाइटों और सत्यापित ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से ही टिकट बुक करें। किसी भी वेबसाइट पर भुगतान करने से पहले उसके डोमेन, ग्राहक समीक्षाओं और संपर्क विवरण की जांच करना जरूरी है। अत्यधिक सस्ते टिकट या असामान्य छूट के दावों को संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए।

यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित साइबर गिरोह भारत में मौजूद तकनीकी संसाधनों का दुरुपयोग कर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय और डिजिटल ढांचे को खंगाल रही हैं ताकि ठगी की वास्तविक रकम, पीड़ितों की संख्या और गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके।

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