नोएडा: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नोएडा में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक चीनी नागरिक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी शेल कंपनियों का नेटवर्क संचालित कर हवाला लेनदेन और अन्य कथित आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। STF का दावा है कि गिरफ्तार चीनी नागरिक का वीजा वर्ष 2020 में समाप्त हो गया था, इसके बावजूद वह भारत में अवैध रूप से रह रहा था और कई फर्जी कंपनियां बनाकर संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को अंजाम दे रहा था।
प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपियों ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर हवाला नेटवर्क संचालित करने और अवैध धन के प्रवाह को छिपाने के लिए किया। एजेंसियों को आशंका है कि इन कंपनियों के माध्यम से विभिन्न वित्तीय लेनदेन को वैध कारोबार का स्वरूप देने की कोशिश की गई। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था, इससे जुड़े अन्य लोग कौन हैं और कथित अवैध धन का स्रोत तथा अंतिम गंतव्य क्या था।
कार्रवाई के दौरान STF ने आरोपियों के कब्जे से पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, फर्जी आधार कार्ड, दो चीनी पासपोर्ट, कई चेक बुक, विभिन्न कंपनियों की मुहरें, कंपनी पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों से नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और संभावित सहयोगियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
अधिकारियों के अनुसार बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि ईमेल, वित्तीय रिकॉर्ड, मैसेजिंग एप्लिकेशन, बैंकिंग विवरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सके। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या इस नेटवर्क के संबंध देश या विदेश में सक्रिय अन्य व्यक्तियों अथवा संगठनों से जुड़े हुए हैं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपियों ने शेल कंपनियों का गठन किस प्रकार किया, उनके निदेशक और लाभार्थी कौन थे तथा इन कंपनियों के माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन किया गया। यदि जांच में धनशोधन, विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन या अन्य आर्थिक अपराधों के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता के अनुसार, शेल कंपनियां और डिजिटल वित्तीय माध्यम संगठित आर्थिक अपराधों में तेजी से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। बैंकिंग रिकॉर्ड, कॉरपोरेट दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, आईपी लॉग और संचार डेटा का संयुक्त विश्लेषण ऐसे नेटवर्क की वास्तविक संरचना उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा विश्लेषण और जोखिम-आधारित निगरानी प्रणाली भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पहचान को अधिक प्रभावी बना रही हैं।
उत्तर प्रदेश STF ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित नेटवर्क का संचालन कब से किया जा रहा था, इससे कितने लोग जुड़े थे और क्या इसका संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय हवाला या संगठित आर्थिक अपराध सिंडिकेट से है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
