नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भारत में आतंकी संगठनों द्वारा कथित तौर पर अपनाए जा रहे एक नए ‘थ्री-ऐप मॉडल’ का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मॉडल के तहत पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से युवाओं से संपर्क स्थापित किया जाता है, फिर उन्हें टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर ले जाकर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया जाता है और अंत में आतंकी गतिविधियों के लिए क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन उपलब्ध कराया जाता है। यह जानकारी हाल ही में देशभर में 20 से अधिक स्थानों पर की गई छापेमारी और जांच के दौरान सामने आई है।
एनआईए के अनुसार, भर्ती की प्रक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संभावित युवाओं की पहचान और उनसे संपर्क स्थापित करने से शुरू होती है। विश्वास कायम होने के बाद उन्हें टेलीग्राम के निजी या बंद समूहों में शामिल किया जाता है, जहां सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी अपेक्षाकृत कठिन होती है।
जांच में सामने आया है कि इन बंद समूहों में शामिल किए गए लोगों को धीरे-धीरे कट्टरपंथी और हिंसक विचारधारा से जुड़ी सामग्री दिखाई जाती है। एजेंसी का दावा है कि कुछ मामलों में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने, हथियार जुटाने और विदेश जाकर प्रशिक्षण लेने से संबंधित निर्देश भी साझा किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरी गतिविधि को विदेशी हैंडलर, बहु-स्तरीय वर्चुअल नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों की मदद से संचालित किया जा रहा था।
एनआईए के मुताबिक, पहचान छिपाने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए ऑटो-डिलीट चैट, कोड वर्ड, फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल, बर्नर फोन और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। जांच में ऐसे सोशल मीडिया हैंडल और डिजिटल माध्यम भी सामने आए हैं, जिनका उपयोग कथित तौर पर निर्देश और चरमपंथी सामग्री प्रसारित करने के लिए किया जाता था।
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एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान तमिलनाडु, विजयवाड़ा और मंगलुरु से जुड़े तीन कथित आतंकी मॉड्यूल के साक्ष्य मिले हैं। एक मामले में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के नाम पर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ग्रुप बनाकर कट्टरपंथी सामग्री साझा किए जाने का आरोप है। दूसरे मामले में संदिग्धों को विदेश जाकर प्रशिक्षण लेने और चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किए जाने के आरोप सामने आए हैं। वहीं एक अन्य मामले में एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन के जरिए आईईडी बनाने के निर्देश साझा करने तथा क्रिप्टोकरेंसी और म्यूल बैंक खातों के माध्यम से धन के लेनदेन के आरोपों की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन कथित नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य युवाओं की भर्ती करना, उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना, वित्तीय संसाधन जुटाना और डिजिटल माध्यमों से आतंकी गतिविधियों का विस्तार करना है। अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इनके निशाने पर केवल बेरोजगार युवा ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्र, चालक तथा अन्य शिक्षित युवा भी हैं, जिनकी आयु मुख्य रूप से 18 से 30 वर्ष के बीच है।
एनआईए के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद से जुड़ी जांचों में डिजिटल माध्यमों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। एजेंसी का कहना है कि वर्ष 2025 में उसने 55 नए मामले दर्ज किए, जिनमें 276 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं जुलाई 2026 में की गई एक कार्रवाई के दौरान 11 आरोपियों, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, को पकड़ा गया।
भारत सरकार के पूर्व सुरक्षा सचिव और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन झा आजाद के अनुसार, साइबर आधारित आतंकवाद और संगठित आपराधिक नेटवर्क अब एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफॉर्म, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल तकनीकों का समान रूप से उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल एक ओर चरमपंथी भर्ती के लिए किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर संगठित अपराध से जुड़े गिरोह भी इन्हीं माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं।
फिलहाल एनआईए की जांच जारी है। एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन और ऑनलाइन संचार नेटवर्क की जांच कर पूरे कथित आतंकी नेटवर्क की पहचान करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
