नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को दिल्ली की एक विशेष अदालत से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने जांच एजेंसी को मामले की आरोपी मनीषा संजय हवालदार के अतिरिक्त हस्तलेखन और हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति दे दी है। सीबीआई का कहना है कि मामले में उपलब्ध बड़ी संख्या में दस्तावेजों की निष्पक्ष फोरेंसिक जांच और तुलना के लिए अतिरिक्त नमूनों की आवश्यकता है।
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आरोपी के अतिरिक्त हस्तलेखन और हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति मांगी गई थी। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि पहले भी 30 मई को आरोपी के हस्तलेखन के नमूने लेने की अनुमति मिल चुकी थी, लेकिन जांच के दौरान सामने आए विस्तृत रिकॉर्ड और दस्तावेजों के कारण अतिरिक्त नमूनों की आवश्यकता महसूस हुई।
सीबीआई के अनुसार जांच में सामने आया है कि मनीषा संजय हवालदार ने कथित रूप से सह-आरोपी मनीषा मंधारे को हस्तलिखित भौतिकी के प्रश्न उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा आरोप है कि उसने एक अन्य आरोपी तेजस हर्षद कुमार शाह को भी भौतिकी के प्रश्न डिक्टेट किए थे। जांच के दौरान मनीषा मंधारे के मोबाइल फोन से भौतिकी के प्रश्नों से संबंधित हस्तलिखित नोट्स की तस्वीरें भी बरामद की गई हैं, जिनका फोरेंसिक परीक्षण किया जा रहा है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई आरोपी के अतिरिक्त हस्तलेखन और हस्ताक्षर के नमूने संबंधित जेल में ले सकती है। साथ ही जेल अधीक्षक को निर्देश दिया गया है कि 27 जुलाई से 29 जुलाई तक कार्यालय समय के दौरान सीबीआई अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नमूने लेने की पूरी प्रक्रिया एक स्वतंत्र गवाह की उपस्थिति में पूरी की जाएगी, जिसे सीबीआई अपने साथ लाएगी।
जांच एजेंसी का तर्क था कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की संख्या काफी अधिक है और प्रत्येक दस्तावेज की निष्पक्ष तुलना तथा वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए अतिरिक्त नमूनों की जरूरत है। हस्तलेखन विशेषज्ञ इन नमूनों की तुलना बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से करेंगे, जिससे यह स्थापित करने में मदद मिल सके कि संबंधित हस्तलिखित सामग्री किसने तैयार की थी।
सीबीआई अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी कथित पेपर लीक नेटवर्क, प्रश्नपत्रों के प्रसार, आर्थिक लेनदेन और इसमें शामिल अन्य संभावित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
यह मामला उस समय सामने आया जब 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे। इसके बाद 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी थी। बाद में अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसने कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियों के बाद कथित साजिश की परतें खोलने का दावा किया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार किसी आपराधिक मामले में हस्तलेखन और हस्ताक्षर के अतिरिक्त नमूने लेने की अनुमति तब दी जाती है जब जांच एजेंसी यह साबित कर दे कि उपलब्ध साक्ष्यों के वैज्ञानिक परीक्षण और निष्पक्ष जांच के लिए उनकी आवश्यकता है। ऐसे नमूने फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में दस्तावेजों, नोट्स और अन्य लिखित साक्ष्यों से मिलान के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। फिलहाल सीबीआई अदालत के निर्देशानुसार निर्धारित तिथियों पर नमूने लेकर जांच को आगे बढ़ाएगी, जिसके आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
