कानपुर (उत्तर प्रदेश): राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के परिणाम में कानपुर के पनकी क्षेत्र की एक छात्रा के अंकों को लेकर विवाद सामने आया है। छात्रा और उसके परिवार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परिणाम प्रक्रिया में कथित तकनीकी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। छात्रा आर्या सिंह का दावा है कि उसकी OMR शीट और फाइनल आंसर-की के मिलान के आधार पर उसके 609 अंक बनने चाहिए थे, जबकि आधिकारिक पोर्टल पर परिणाम जारी होने के बाद उसके अंक कई बार बदलते दिखाई दिए।
छात्रा के परिवार के अनुसार, गुरुवार रात NEET परिणाम जारी होने के बाद आर्या ने आधिकारिक वेबसाइट पर अपना स्कोरकार्ड देखा, जिसमें उसके 540 अंक प्रदर्शित हो रहे थे। परिवार का आरोप है कि रात करीब 2 बजे दोबारा परिणाम देखने पर वही स्कोर घटकर केवल 167 अंक रह गया।
आर्या के पिता राकेश कुमार सिंह, जो पूर्व सैनिक हैं, ने आरोप लगाया कि यह बदलाव NTA पोर्टल पर अपलोड की गई OMR शीट से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण हुआ। उनके अनुसार, शुरुआत में पोर्टल पर दिखाई गई OMR शीट का सीरियल नंबर 3823333 था, जिसमें प्रश्न संख्या 77 गायब थी और एक अन्य प्रश्न की प्रविष्टि दो बार दर्ज दिखाई दे रही थी।
परिवार का कहना है कि उन्होंने इस गड़बड़ी को लेकर NTA के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद कथित रूप से OMR शीट में सुधार किया गया, लेकिन परिवार का आरोप है कि सुधार के बाद OMR का सीरियल नंबर 3823333 से बदलकर 3824338 कर दिया गया। परिवार ने इस बदलाव को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और पूरे रिकॉर्ड की दोबारा जांच की मांग की है।
छात्रा ने कथित तौर पर इस मामले की शिकायत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और NTA को ईमेल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से भेजी है। परिवार ने शिकायत के साथ OMR शीट, चैलेंज आवेदन की रसीद, अपडेटेड OMR रिकॉर्ड और फाइनल आंसर-की सहित सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।
फिलहाल परिवार के अनुसार, आधिकारिक पोर्टल पर छात्रा के केवल 167 अंक प्रदर्शित हो रहे हैं। परिजनों ने NTA और शिक्षा मंत्रालय से परीक्षा रिकॉर्ड, OMR शीट और परिणाम गणना प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कर सही अंक जारी करने की मांग की है।
राकेश कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर इस मामले में संतोषजनक समाधान नहीं किया गया तो वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय का रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मामला छात्रा के भविष्य से जुड़ा है और इसमें पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से स्पष्ट की जानी चाहिए।
शिक्षा और परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं में परिणाम संबंधी विवादों के समाधान के लिए स्कैन की गई OMR शीट, उत्तर कुंजी, डिजिटल रिकॉर्ड और परिणाम तैयार करने वाली प्रणाली की तकनीकी जांच आवश्यक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तकनीकी विसंगति को दस्तावेजी सत्यापन और स्पष्ट प्रक्रिया के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई अभ्यर्थी आधिकारिक परीक्षा रिकॉर्ड और घोषित परिणाम के बीच स्पष्ट अंतर साबित कर देता है, तो न्यायालय परीक्षा संचालन संस्था की प्रक्रिया और निर्णय की समीक्षा कर सकता है। हालांकि, केवल आरोपों के आधार पर किसी संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती और अंतिम निर्णय उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड तथा साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
NTA की ओर से छात्रा के आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छात्रा का परिवार परीक्षा एजेंसी और शिक्षा मंत्रालय के जवाब का इंतजार कर रहा है, जबकि मामला फिलहाल जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में है।
