नई दिल्ली: ऑनलाइन बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सख्ती बढ़ाते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. के खिलाफ बाल यौन शोषण एवं दुरुपयोग सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के आरोपों की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कंपनी द्वारा दिए गए जवाब की समीक्षा के बाद की गई है और फिलहाल किसी प्रकार के उल्लंघन पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित तथ्यों की विस्तृत पड़ताल कर आरोपों की सत्यता का पता लगाना है।
सूत्रों के अनुसार यह मामला 3 जुलाई 2026 को जारी किए गए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) नोटिस से जुड़ा है। आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह नोटिस जारी किया था, जिसमें दावा किया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण एवं दुरुपयोग सामग्री से जुड़े कथित विज्ञापन दिखाई दिए थे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था और यह बताने को कहा था कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उसके प्लेटफॉर्म पर कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं।
जानकारी के अनुसार मेटा ने आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया था। आयोग ने कंपनी के उत्तर, उपलब्ध दस्तावेजों और प्रारंभिक तथ्यों की समीक्षा के बाद मामले में औपचारिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया। हालांकि एनसीपीसीआर ने अभी तक मेटा के जवाब की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है और न ही यह बताया है कि प्रारंभिक समीक्षा में कौन-कौन से बिंदु जांच के दायरे में आए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि औपचारिक जांच शुरू किए जाने का अर्थ किसी पक्ष को दोषी ठहराना नहीं है। जांच के दौरान उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, तकनीकी रिकॉर्ड, प्लेटफॉर्म की नीतियों, कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और अन्य संबंधित तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। इसके आधार पर ही यह निर्धारित किया जाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और क्या किसी प्रकार के नियामकीय या कानूनी उल्लंघन के संकेत मिलते हैं।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत किया गया है। आयोग को बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करने, स्वतः संज्ञान लेने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा, ऑनलाइन शोषण, साइबर अपराध और इंटरनेट के माध्यम से बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध भी आयोग के अधिकार क्षेत्र में शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बाल सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। आधुनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, हैश-मैचिंग तकनीक, स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन और उपयोगकर्ता रिपोर्टिंग तंत्र का उपयोग कर प्रतिबंधित सामग्री की पहचान और उसे हटाने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद अपराधी लगातार नए तरीके अपनाते हैं, जिससे ऐसे मामलों की रोकथाम और जांच और अधिक जटिल हो जाती है।
मेटा अपनी वैश्विक सुरक्षा नीतियों में पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह बाल यौन शोषण से संबंधित किसी भी सामग्री, उसके प्रचार या वितरण को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। कंपनी का कहना रहा है कि ऐसे मामलों में वह उन्नत तकनीकी प्रणालियों, विशेषज्ञ सुरक्षा टीमों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय के माध्यम से कार्रवाई करता है। हालांकि मौजूदा मामले में कंपनी के जवाब और उसके सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता का आकलन अब एनसीपीसीआर की औपचारिक जांच के दौरान किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी कंपनियों, नियामक संस्थाओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अभिभावकों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। मजबूत कंटेंट मॉडरेशन, त्वरित शिकायत निवारण, प्रभावी डिजिटल निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़े अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
