महाराष्ट्र के न्हावा शेवा पोर्ट पर अखरोट (Walnut) के आयात से जुड़ा एक बड़ा कस्टम ड्यूटी चोरी का मामला सामने आया है, जिसमें करीब ₹138.84 करोड़ के राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है। इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क फर्जी दस्तावेजों और गलत मूल देश (Country of Origin) की घोषणा के जरिए कस्टम ड्यूटी में भारी हेराफेरी कर रहा था।
जांच एजेंसियों ने इस रैकेट का भंडाफोड़ ‘ऑपरेशन CO-FIND’ के तहत किया, जिसे जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस (JNCH) की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने विशेष इनपुट के आधार पर शुरू किया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से हाई-वैल्यू अखरोट की खेपों की गलत घोषणा कर रहा था।
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अधिकारियों के मुताबिक, चीन, अमेरिका और चिली से आने वाली खेपों को जानबूझकर संयुक्त अरब अमीरात के जेबेल अली पोर्ट के जरिए ट्रांजिट दिखाया गया और उन्हें अफगानिस्तान मूल का बताया गया। इस फर्जी दावे के आधार पर आयातकों ने दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) के तहत मिलने वाली रियायती कस्टम ड्यूटी का गलत फायदा उठाया।
इस योजना के तहत अखरोट पर लगने वाली लगभग 110% ड्यूटी को घटाकर करीब 5% कर दिया गया, जिससे आरोपियों को भारी अवैध लाभ हुआ और सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा।
जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट ने फर्जी बिल ऑफ लाडिंग और नकली ट्रांजिट डॉक्यूमेंट तैयार किए, जिनमें ईरान के बंदर अब्बास और दुबई के जेबेल अली जैसे पोर्ट्स के जरिए माल की काल्पनिक आवाजाही दिखाई गई। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कस्टम अधिकारियों को गुमराह करना और असली स्रोत छिपाना था।
अधिकारियों ने बताया कि न्हावा शेवा पोर्ट पर अखरोट के आयात में अफगानिस्तान मूल के नाम पर अचानक तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद एक असामान्य गिरावट देखी गई। यह पैटर्न सामान्य व्यापारिक गतिविधियों से मेल नहीं खाता, जिससे संदेह और मजबूत हुआ।
इस घोटाले से न केवल सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ, बल्कि घरेलू बाजार पर भी असर पड़ा। सस्ते दाम पर आयातित अखरोट की वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों को नुकसान हुआ, जहां अखरोट उत्पादन एक महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि है।
छापेमारी के दौरान मुंबई और आसपास के इलाकों में कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की गई, जिसमें डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए गए। अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें स्नेह दीपकभाई काकड़िया भी शामिल हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क का एक प्रमुख संचालक बताया है।
अधिकारियों के अनुसार, काकड़िया को 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच जारी है।
इस बीच, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक संबंधित याचिका में जब्त खेपों की बिना शर्त रिहाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि खेप तभी छोड़ी जाएगी जब पूरा अंतर शुल्क ₹2.78 करोड़ जमा किया जाए या उसके बराबर बैंक गारंटी दी जाए।
जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी पूरे नेटवर्क के लाभार्थियों, वित्तीय कनेक्शनों और अन्य संबंधित खेपों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इसी तरह की तकनीक अन्य आयात घोटालों में भी इस्तेमाल हुई है।
अधिकारियों ने इसे एक अत्यधिक संगठित और जटिल अंतरराष्ट्रीय कस्टम धोखाधड़ी करार दिया है, जो दस्तावेजों में हेरफेर और व्यापार समझौतों के दुरुपयोग पर आधारित थी। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
