नवी मुंबई: नवी मुंबई पुलिस ने एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ऐसे तीन बैंक खातों का पता लगाया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर देशभर में हुई ऑनलाइन ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने और अंततः निकालने के लिए किया जा रहा था। जांच के अनुसार, इन खातों के माध्यम से लगभग ₹11.5 करोड़ की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन हुआ है। पुलिस का कहना है कि ये खाते कथित तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे और इनका संबंध देशभर में दर्ज लगभग 1,450 साइबर अपराध शिकायतों से पाया गया है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में 20 जुलाई को नवी मुंबई साइबर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 317(2) (चोरी की संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) और 3(5) (सामान्य आशय) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामला साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण के बाद दर्ज किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि संबंधित बैंक खातों के धारकों और संचालकों ने कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने, छिपाने और आगे विभिन्न खातों में भेजने में मदद की। प्रारंभिक जांच में उन्हें एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा होने का संदेह है। पुलिस के अनुसार, कथित अपराध नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच किए गए।
मामले की जांच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर दर्ज शिकायतों के विश्लेषण से शुरू हुई। जांचकर्ताओं ने साइबर ठगी की रकम के वित्तीय प्रवाह का पीछा करते हुए नवी मुंबई में संचालित तीन बैंक खातों की पहचान की, जिनमें विभिन्न राज्यों के पीड़ितों से ठगी गई रकम जमा की जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक, जांच में एक सुव्यवस्थित नेटवर्क का संकेत मिला है, जिसमें अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कुछ लोग कथित तौर पर विभिन्न ऑनलाइन ठगी के माध्यम से लोगों को निशाना बनाते थे, जबकि अन्य बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसके बाद ठगी की रकम को कई चरणों में अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर निकाला जाता था, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना कठिन हो जाए।
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जांच में सामने आया कि इन तीन बैंक खातों में लगभग ₹11.5 करोड़ की संदिग्ध धनराशि प्राप्त हुई थी। वहीं, महाराष्ट्र साइबर द्वारा किए गए व्यापक वित्तीय विश्लेषण में पता चला कि इन खातों से होकर कुल लगभग ₹18.8 करोड़ का लेनदेन हुआ, जिसे बाद में विभिन्न खातों में स्थानांतरित या नकद निकाला गया। इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क वर्तमान में सामने आए मामलों से कहीं अधिक बड़े साइबर अपराध से जुड़ा हो सकता है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इन खातों का उपयोग म्यूल बैंक अकाउंट के रूप में किया जा रहा था। साइबर अपराधी अक्सर चोरी की गई धनराशि को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर निकालते हैं, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना और धन का अंतिम गंतव्य पता लगाना कठिन हो जाता है।
पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण कर रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा सके। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या यही गिरोह अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के म्यूल बैंक खातों का संचालन कर रहा था।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि संगठित साइबर अपराधी ठगी की रकम को तेजी से इधर-उधर करने के लिए म्यूल बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से धन की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
