नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में किसानों को खेतों में सोलर प्लांट लगवाने और उससे मोटी कमाई का झांसा देकर कथित तौर पर करीब ₹1 करोड़ की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो लोगों ने खुद को अदाणी ग्रीन एनर्जी से जुड़ा प्रतिनिधि बताकर किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जमीन पर सोलर प्लांट लगाया जाएगा। इसके बदले प्रत्येक एकड़ पर हर साल ₹50 हजार किराया और करीब ₹30 लाख की सब्सिडी दिलाने का दावा किया गया। रकम लेने के बाद न तो प्लांट का काम शुरू हुआ और न ही किसानों को पैसे लौटाए गए। बाद में संबंधित कार्यालय पर ताला लगा मिला।
मामले में अहिल्यानगर जिले के कोपरगांव निवासी 57 वर्षीय किसान दिगंबर सिताराम गाडे ने पंचवटी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, कथित ठगी का सिलसिला जुलाई 2026 से 22 अगस्त 2026 के बीच पंचवटी के दिंडोरी नाका इलाके में स्थित भागचंद कॉम्प्लेक्स के एक कार्यालय से चला। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत में विजय दोंदे नामक व्यक्ति पर खुद को अदाणी ग्रीन एनर्जी का प्रतिनिधि बताने का आरोप लगाया गया है। उसका कथित साथी अभिषेक खुद को कंपनी का मैनेजर बताता था। दोनों ने किसान दिगंबर गाडे और उनके कुछ परिचितों का भरोसा जीतने के बाद सोलर प्लांट लगाने से होने वाले आर्थिक फायदे के बारे में बताया। किसानों को कथित तौर पर बताया गया कि जमीन पर प्लांट लगने के बाद उन्हें नियमित किराया मिलने के साथ सरकारी सब्सिडी भी दिलाई जाएगी।
इसी भरोसे के आधार पर किसानों से अलग-अलग समय पर नकद रकम लिए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनसे और उनके साथियों से ली गई रकम करीब ₹1 करोड़ तक पहुंच गई। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद दोनों ने कोई वैध रसीद नहीं दी और जमीन पर सोलर प्लांट लगाने से संबंधित कोई काम भी शुरू नहीं किया।
कुछ समय बाद किसानों ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की तो मोबाइल फोन बंद मिले। इसके बाद किसानों को संदेह हुआ और वे दिंडोरी नाका स्थित कथित कार्यालय पहुंचे। वहां पहुंचने पर कार्यालय पर ताला लगा मिला। आरोपियों से संपर्क नहीं होने और प्लांट का काम शुरू नहीं होने के बाद किसानों को कथित धोखाधड़ी का पता चला।
इसके बाद दिगंबर गाडे ने पंचवटी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों का अदाणी ग्रीन एनर्जी से वास्तव में कोई संबंध था या उन्होंने कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर किसानों को कथित तौर पर ठगा। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि किसानों से ली गई रकम किन माध्यमों से जमा या हस्तांतरित की गई और इस रकम में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस टीम और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों ने कथित कार्यालय का निरीक्षण कर मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस कार्यालय से मिले दस्तावेजों, अन्य सामग्री और संभावित लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, अब आरोपियों की तलाश के साथ-साथ कथित ठगी की पूरी रकम और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरीके से अन्य किसानों को भी सोलर प्लांट का झांसा देकर रकम ली गई थी। आरोपों की पुष्टि और साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
