नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में साइबर ठगों ने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर 68 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी से ₹71 लाख की कथित ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का अधिकारी बताकर पीड़ित को करीब 20 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराए रखा। उन्होंने दावा किया कि कश्मीर में गिरफ्तार एक आतंकवादी के पास से पीड़ित का आधार कार्ड मिला है और उसके नाम पर खोले गए बैंक खाते के जरिए ₹70 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है।
पीड़ित पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक के पद से करीब एक दशक पहले सेवानिवृत्त हुए थे। आरोपियों ने उन्हें गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त किए जाने की धमकी दी। लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे उनकी बचत और निवेश की जानकारी हासिल की गई। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया गया।
महिला ने खुद को मुंबई एटीएस अधिकारी बताया
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, ठगी की शुरुआत 28 सितंबर को हुई, जब एक महिला ने पीड़ित को फोन किया। उसने अपनी पहचान इंस्पेक्टर सीमा रॉय के रूप में बताते हुए खुद को मुंबई स्थित एटीएस मुख्यालय का अधिकारी बताया। महिला ने पीड़ित से पूछा कि क्या वह कभी कश्मीर गए थे। उनके इनकार करने पर उसने दावा किया कि कश्मीर में दो आतंकवादी गिरफ्तार किए गए हैं और उनमें से एक के पास उनका आधार कार्ड मिला है।
महिला ने कथित तौर पर यह भी कहा कि संदिग्धों को लखनऊ एटीएस की हिरासत में रखा गया है और इस मामले में पीड़ित को वहां के अधिकारियों से बात करनी होगी। इस बातचीत के करीब एक घंटे बाद पीड़ित के पास व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया।
वर्दी पहनकर वीडियो कॉल पर दी धमकी
वीडियो कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान विक्रम सिंह के रूप में बताई और वह पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया। उसने आरोप लगाया कि पीड़ित के आधार विवरण का इस्तेमाल एक निजी बैंक में खाता खोलने के लिए किया गया है। उसके मुताबिक, उस खाते के जरिए ₹70 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और इसका उल्लेख प्राथमिकी में भी है।
पीड़ित ने कथित तौर पर बैंक में अपना कोई खाता होने या मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने से इनकार किया। इसके बावजूद ठगों ने दबाव बनाना जारी रखा। वीडियो कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि एनआईए प्रमुख ने पीड़ित की संपत्तियों की प्रारंभिक जांच को मंजूरी दे दी है। इसके बाद आरोपियों ने उनके परिवार, आर्थिक स्थिति और निवेश से संबंधित सवाल पूछे तथा गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने की धमकी दी।
तीन किस्तों में ट्रांसफर कराए ₹71 लाख
28 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच आरोपियों ने पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लगातार डराए रखा। उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी गई और कथित जांच का हवाला देकर उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने की कोशिश की गई। इसी दौरान उनसे बचत की पूरी जानकारी लेकर आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में रकम भेजने को कहा गया।
पीड़ित ने 5 अक्टूबर को ₹41 लाख, 8 अक्टूबर को ₹25 लाख और 13 अक्टूबर को ₹5 लाख ट्रांसफर किए। इस तरह कुल ₹71 लाख आरोपियों के बताए खातों में चले गए। अंतिम भुगतान के बाद जब कॉल करने वालों ने जवाब देना बंद कर दिया, तब पीड़ित को ठगी का संदेह हुआ।
17 अक्टूबर को दर्ज कराई शिकायत
इसके बाद पीड़ित ने 17 अक्टूबर को नासिक सिटी साइबर पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने सीमा रॉय, विक्रम सिंह और राकेश अग्रवाल नामों का इस्तेमाल किया था। बातचीत के लिए व्हाट्सएप के अलावा सिग्नल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर संबंधित बैंकों को पत्र भेजे हैं और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किन खातों में भेजी गई और उसके आगे के लेनदेन की कड़ियां कहां तक जाती हैं।
यह घटना दिखाती है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और बड़ी वित्तीय जांच का डर दिखाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को घर में बंधे रहने या जांच के नाम पर निजी बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने का निर्देश देकर कानूनी हिरासत में नहीं रखती। ऐसे दबाव की स्थिति में रकम भेजने के बजाय स्वतंत्र रूप से संबंधित पुलिस इकाई से संपर्क करना और तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देना महत्वपूर्ण है।
