कूरियर कंपनी के कस्टमर केयर बनकर ठगों ने हासिल की मोबाइल तक पहुंच; कई अनधिकृत ट्रांजैक्शनों के जरिए बैंक खातों से निकाली रकम

नागपुर में साइबर ठगी का नया जाल: पार्सल की जानकारी लेने पर रिटायर्ड कर्मचारी के खाते से उड़े ₹2 लाख

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By Roopa
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नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को निशाना बनाकर ₹2 लाख की ठगी को अंजाम दिया। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि किस प्रकार साइबर ठग आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों और भरोसे का फायदा उठाकर उनके बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। इस घटना में अपराधियों ने खुद को एक कूरियर कंपनी का ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताकर बुजुर्ग व्यक्ति को अपने जाल में फंसाया और बाद में उसके बैंक खातों से पूरी रकम निकाल ली।

जानकारी के अनुसार, 74 वर्षीय रमेश दर्वेकर नागपुर के स्वावलंबी नगर क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने 27 मई को अपनी बेटी के लिए गुजरात एक पार्सल भेजा था। कुछ दिनों तक पार्सल गंतव्य तक नहीं पहुंचा तो उन्हें चिंता हुई। पार्सल की स्थिति जानने और समस्या का समाधान कराने के लिए उन्होंने संबंधित कूरियर कंपनी के ग्राहक सेवा नंबर से संपर्क किया।

यहीं से साइबर ठगों ने अपनी योजना को अंजाम देना शुरू किया। शिकायत के समाधान का भरोसा दिलाते हुए कथित ग्राहक सेवा प्रतिनिधियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से उनसे संपर्क किया। बातचीत के दौरान ठगों ने तकनीकी सहायता और पार्सल ट्रैकिंग की प्रक्रिया बताने के बहाने कुछ जानकारियां मांगीं। पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि यह सब केवल पार्सल की स्थिति अपडेट करने और समस्या हल करने के लिए आवश्यक है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, इसी प्रक्रिया के दौरान साइबर अपराधियों ने किसी तरह पीड़ित के मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने मोबाइल और बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग करते हुए दो राष्ट्रीयकृत बैंकों में मौजूद खातों से कई अनधिकृत लेनदेन किए। कुछ ही समय में लगभग ₹2 लाख की पूरी राशि खातों से निकाल ली गई।

घटना का खुलासा तब हुआ जब रमेश दर्वेकर ने अपने खातों की जांच की और धनराशि गायब पाई। बैंक रिकॉर्ड देखने पर उन्हें पता चला कि उनके खातों से कई ट्रांजैक्शन किए गए हैं, जिनकी उन्होंने कोई अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद उन्होंने तत्काल स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रताप नगर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि अपराधियों ने मोबाइल फोन तक पहुंच कैसे प्राप्त की और धनराशि किन खातों में ट्रांसफर की गई।

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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में कस्टमर केयर, बैंक अधिकारी, कूरियर एजेंट और सरकारी प्रतिनिधि बनकर की जाने वाली धोखाधड़ी में तेजी से वृद्धि हुई है। अपराधी अक्सर लोगों को तकनीकी सहायता, रिफंड, केवाईसी अपडेट या डिलीवरी समस्या समाधान का झांसा देकर मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करते हैं। एक बार पहुंच मिल जाने पर वे बैंकिंग ऐप, एसएमएस और अन्य वित्तीय जानकारियों का दुरुपयोग कर सकते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर ठग अब सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का बेहद पेशेवर तरीके से उपयोग कर रहे हैं। वे लोगों की तत्काल जरूरतों और चिंताओं को समझकर उन्हें विश्वास में लेते हैं और फिर मोबाइल एक्सेस, स्क्रीन शेयरिंग या संवेदनशील जानकारी हासिल कर वित्तीय अपराध को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी ग्राहक सेवा प्रतिनिधि को ओटीपी, बैंकिंग जानकारी, स्क्रीन एक्सेस या मोबाइल नियंत्रण से संबंधित अनुमति कभी नहीं देनी चाहिए।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, व्हाट्सएप संदेश या तकनीकी सहायता अनुरोध पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति बैंक, कूरियर कंपनी या किसी संस्था का प्रतिनिधि बनकर संवेदनशील जानकारी मांगता है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आवश्यक है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए और निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी के पीछे कौन-सा साइबर नेटवर्क सक्रिय था। अधिकारियों को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड के विश्लेषण से आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

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