बेंगलुरु: गर्मियों की छुट्टियों में घूमने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। कर्नाटक के मयसूर में साइबर ठगों के एक संगठित गिरोह ने फर्जी लग्ज़री रिज़ॉर्ट वेबसाइट्स के जरिए कम से कम ₹6 लाख की ठगी को अंजाम दिया। यह पूरा खेल इतना सुनियोजित था कि गूगल पर होटल सर्च करने वाले आम लोग आसानी से इसके जाल में फंस गए।
मामला तब सामने आया जब एक प्रतिष्ठित रिज़ॉर्ट प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके ब्रांड के नाम से मिलती-जुलती कई फर्जी वेबसाइट्स बनाई गई हैं। इन वेबसाइट्स का डिज़ाइन, लोगो और कंटेंट असली पोर्टल से लगभग हूबहू कॉपी किया गया था, जिससे आम यूज़र के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना बेहद मुश्किल हो गया।
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने सिर्फ वेबसाइट ही नहीं बनाई, बल्कि फर्जी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भी सक्रिय किए थे। इन संपर्क माध्यमों के जरिए ग्राहक सीधे ठगों से जुड़ते थे, जिन्हें पेशेवर तरीके से हैंडल किया जाता था ताकि किसी को शक न हो।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन फर्जी वेबसाइट्स को गूगल बिज़नेस लिस्टिंग में इस तरह सेट किया गया था कि वे सर्च रिज़ल्ट्स में ऊपर दिखाई दें। जैसे ही कोई व्यक्ति लग्ज़री होटल या रिज़ॉर्ट सर्च करता, ये नकली लिंक सामने आ जाते और यूज़र सीधे ठगों के जाल में पहुंच जाता।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक कम से कम आठ लोग इस ठगी का शिकार हो चुके हैं। ठग ग्राहकों को यह कहकर जल्दबाज़ी में डालते थे कि “कमरे तेजी से बुक हो रहे हैं” और “अभी पेमेंट नहीं किया तो मौका हाथ से निकल जाएगा।” इस मनोवैज्ञानिक दबाव के चलते लोग बिना वेबसाइट की पुष्टि किए तुरंत UPI के जरिए एडवांस पेमेंट कर देते थे।
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एक अधिकारी ने बताया कि पीक सीजन—खासकर गर्मियों की छुट्टियों—में होटल बुकिंग की जल्दबाज़ी ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार बनती है। लोग अच्छे ऑफर्स और लिमिटेड अवेलेबिलिटी के लालच में जरूरी सावधानियां भूल जाते हैं, जिसका फायदा साइबर गिरोह उठाते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का क्लासिक उदाहरण है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा इंसानी मनोविज्ञान का इस्तेमाल करते हैं। वे डर, लालच और जल्दबाज़ी पैदा कर निर्णय क्षमता को कमजोर करते हैं, जिससे व्यक्ति बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर कर देता है।”
इस पूरे मामले में यह भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने के बाद ही इन फर्जी वेबसाइट्स को हटाया जा सका, तब तक नुकसान हो चुका था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है ताकि नुकसान को सीमित किया जा सके।
क्या हैं खतरे के संकेत?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी होटल वेबसाइट पर असामान्य रूप से भारी छूट दी जा रही हो, या तुरंत भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा हो, तो सतर्क हो जाना चाहिए। इसके अलावा वेबसाइट का URL ध्यान से जांचना, आधिकारिक वेबसाइट से मिलान करना और होटल से सीधे कॉल कर पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
कैसे बचें इस जाल से?
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म या होटल की आधिकारिक वेबसाइट से ही बुकिंग करें। गूगल सर्च पर दिखने वाले हर लिंक पर आंख बंद करके भरोसा न करें। किसी भी पेमेंट से पहले होटल के आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।
गर्मियों की छुट्टियों का आनंद लेने की योजना अगर सावधानी के साथ बनाई जाए, तो न केवल पैसे की बचत होगी बल्कि एक सुरक्षित और सुखद यात्रा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
