मुंबई के सुनील नेल्लाथु रामकृष्णन उर्फ क्रिश गिरफ्तार: थाईलैंड के रास्ते म्यांमार के साइबर फ्रॉड कैंप में भारतीय युवाओं को तस्करी। डिजिटल अरेस्ट, रोमांस स्कैम करवाते थे। CBI जांच तेज।

म्यांमार साइबर स्लेवरी नेटवर्क का सरगना गिरफ्तार: नौकरी के नाम पर भारतीयों को बनाते थे ‘डिजिटल गुलाम’

Team The420
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले साइबर ठगी और मानव तस्करी के खतरनाक गठजोड़ का बड़ा खुलासा करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक ऐसे नेटवर्क के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो भारतीय युवाओं को विदेश में नौकरी का लालच देकर साइबर फ्रॉड के अड्डों तक पहुंचाता था। इस मामले में मुंबई निवासी सुनील नेल्लाथु रामकृष्णन उर्फ क्रिश को गिरफ्तार किया गया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जा रहा है।

जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह भारतीय नागरिकों को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर पहले दिल्ली से बैंकॉक भेजता था। इसके बाद उन्हें गुप्त तरीके से म्यांमार के म्यावाडी इलाके—खासतौर पर कुख्यात ‘केके पार्क’—ले जाया जाता था, जहां साइबर ठगी के बड़े केंद्र संचालित होते हैं।

इन ठिकानों पर पहुंचने के बाद पीड़ितों को जबरन साइबर अपराधों में शामिल किया जाता था। इनमें “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम, रोमांस फ्रॉड और क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर ठगी जैसे अपराध शामिल हैं, जिनके जरिए दुनियाभर के लोगों को निशाना बनाया जाता था। पीड़ितों को न केवल उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ता था। उनकी आवाजाही पर सख्त पाबंदी होती थी और लगातार निगरानी में रखा जाता था।

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इस नेटवर्क का खुलासा उस समय हुआ जब 2025 के दौरान कुछ भारतीय नागरिक किसी तरह इन साइबर ठगी केंद्रों से भागने में सफल रहे। वे थाईलैंड पहुंचे और बाद में मार्च और नवंबर 2025 में उन्हें भारत वापस लाया गया। इन पीड़ितों से विस्तृत पूछताछ के बाद एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के बारे में अहम जानकारी मिली।

इसी खुफिया जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी ने लगातार निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के जरिए इस गिरोह के मुख्य संचालकों की पहचान की। जांच में सुनील उर्फ क्रिश की भूमिका एक प्रमुख फेसीलिटेटर और किंगपिन के रूप में सामने आई, जो पीड़ितों को दक्षिण-पूर्व एशिया में अवैध रूप से पहुंचाने और उनके शोषण में अहम भूमिका निभाता था।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। हाल ही में उसके भारत लौटने की जानकारी मिलने पर उसे मुंबई में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसके ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से म्यांमार और कंबोडिया में संचालित नेटवर्क से जुड़े डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नेटवर्क सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर युवाओं को फंसाते हैं। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह अब मानव तस्करी और डिजिटल फ्रॉड को जोड़कर नए तरह के अपराध को अंजाम दे रहे हैं। नौकरी का लालच देकर लोगों को ऐसे ठिकानों तक ले जाया जाता है, जहां उन्हें जबरन साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है।”

जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों—जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं—की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे रैकेट का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किन-किन देशों के नेटवर्क जुड़े हुए हैं।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का खतरनाक रूप ले चुका है।

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