उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कथित चिटफंड घोटाले का मामला सामने आया है, जहां मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर 32.60 लाख रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर छह नामजद और चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज किया है।
यह मुकदमा छजलैट थाना क्षेत्र के गांव संजरपुर निवासी राजेंद्र सिंह की तहरीर पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने वर्ष 2018 में ‘जन लाभ निधि लिमिटेड’ नामक एक चिटफंड कंपनी शुरू की थी और लोगों को आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर निवेश के लिए प्रेरित किया।
FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program
आरडी-एफडी के नाम पर जुटाई रकम
दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों ने कंपनी में आरडी (रिकरिंग डिपॉजिट) और एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) योजनाओं के नाम पर ग्रामीण और आसपास के लोगों से धन जमा कराया। पीड़ित राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनसे और उनके परिचितों से अलग-अलग किस्तों में लाखों रुपये जमा कराए गए।
शिकायत में उल्लेख है कि राजेंद्र सिंह समेत नवीन कुमार, अरविंद कुमार, नरेश कुमार, रामपाल सिंह, राजपाल सिंह, रेखा यादव, गौरव यादव, माया देवी, सुनीता देवी, उमा देवी, प्रतिज्ञा यादव, विमला देवी, शिल्पी यादव, स्वाति यादव और नेमीशरण से कुल 6.50 लाख रुपये जमा कराए गए।
इसी तरह किशन पाल से 6.50 लाख, जय कुमार से ढाई लाख, अजब सिंह से दो लाख और विष्णु सिंह से डेढ़ लाख रुपये लिए गए। अलग-अलग निवेशकों से कुल मिलाकर 32.60 लाख रुपये की राशि जुटाई गई।
पैसा मांगने पर मिली धमकी
पीड़ितों का आरोप है कि जब निवेश अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी जमा राशि और मुनाफा वापस मांगा, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। बाद में कथित तौर पर धमकियां भी दी गईं। लगातार दबाव और रकम वापस न मिलने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली।
कोर्ट के आदेश के बाद सिविल लाइंस थाने में आशियाना निवासी राजवीर सिंह यादव, उनकी पत्नी मधु यादव, बेटे अभिषेक यादव, बेटी प्राची, सूरज यादव, उसके बेटे राकेश यादव तथा चार अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
जांच शुरू, अन्य पीड़ितों की तलाश
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। निवेश से जुड़े दस्तावेज, रसीदें और बैंक लेन-देन का विवरण खंगाला जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं और लोगों से भी इसी तरह रकम तो नहीं जुटाई गई।
जांच एजेंसियां संभावित अन्य पीड़ितों की पहचान में जुटी हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ठगी की वास्तविक राशि 32.60 लाख रुपये से अधिक तो नहीं है।
बढ़ते चिटफंड मामलों पर चिंता
क्षेत्र में चिटफंड कंपनियों के नाम पर निवेश ठगी के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे मुनाफे के लालच में बिना जांच-पड़ताल निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई विवेचना के निष्कर्ष के आधार पर तय की जाएगी।
