झारखंड वेतन घोटाले में बोकारो, हजारीबाग और रांची तक फैले कथित नेटवर्क की जांच तेज हो गई है, जिसमें एक समान मॉडस ऑपरेन्डी सामने आया है।

झारखंड वेतन घोटाला: एक ही ‘मॉडस ऑपरेन्डी’ से बोकारो-हजारीबाग-रांची तक फैला नेटवर्क, जांच में बड़े खुलासे

Team The420
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रांची। झारखंड में सामने आए कथित वेतन निकासी घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसका दायरा और गहराता जा रहा है। बोकारो और हजारीबाग में दर्ज मामलों की पड़ताल के दौरान अब यह संकेत मिले हैं कि पूरे नेटवर्क में एक ही ‘मॉडस ऑपरेन्डी’ का इस्तेमाल किया गया था, जिससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं बल्कि एक संगठित सिस्टम के तहत किया गया काम था।

सीआईडी के अधीन विशेष जांच दल (SIT) से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, बोकारो मामले के मुख्य आरोपी कौशल पांडेय का हजारीबाग में तैनात कर्मियों से लगातार संपर्क था। जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें से कई आरोपी पहले पलामू जिले में एक साथ कार्यरत रह चुके हैं, जिससे उनके बीच आपसी तालमेल और भरोसे का नेटवर्क बना।

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सूत्रों के अनुसार, जब बोकारो में वेतन मद से अवैध निकासी शुरू हुई, उसी तरीके और प्रक्रिया को हजारीबाग में भी दोहराया गया। दोनों जगहों पर एक जैसे पैटर्न, रिकॉर्ड में हेरफेर और सिस्टम के दुरुपयोग की बात सामने आने से जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो अलग-अलग जिलों में सक्रिय था।

जांच में यह भी पाया गया है कि आरोपितों ने वेतन और कोषागार प्रणाली की प्रक्रियागत खामियों का फायदा उठाकर एक समान तकनीक से फंड को अलग-अलग खातों में डायवर्ट किया। इस समानता के आधार पर SIT अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह सिर्फ संयोग था या एक योजनाबद्ध नेटवर्क का हिस्सा।

SIT टीम अब सभी आरोपितों के सर्विस रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। इसमें यह देखा जा रहा है कि कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी कब और कहां तैनात थे, और किन-किन स्थानों पर वे एक साथ काम कर चुके हैं। इसके साथ ही उनके ट्रांसफर इतिहास और कार्यकाल की भी मैपिंग की जा रही है, ताकि आपसी संपर्क और नेटवर्क का पूरा ढांचा सामने आ सके।

जांच का दायरा अब चाईबासा जिले तक भी बढ़ा दिया गया है। यहां यह देखा जा रहा है कि क्या इस नेटवर्क के कुछ सदस्य वहां भी सक्रिय रहे हैं या किसी तरह का संपर्क बनाए रखा गया था। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ दो जिलों तक सीमित नहीं हो सकता और इसकी जड़ें और गहरी हो सकती हैं।

अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें बोकारो के लेखा शाखा से जुड़े कर्मी और होमगार्ड जवान शामिल हैं। इन गिरफ्तारियों के बाद पूरे विभागीय तंत्र में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और अन्य संभावित नामों की भी जांच की जा रही है।

इसी बीच, उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की समीक्षा की। बैठक में जिला प्रशासन द्वारा अब तक तैयार किए गए दस्तावेजों की प्रगति की समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने समिति को बताया कि आवश्यक दस्तावेजों का आधे से अधिक हिस्सा तैयार हो चुका है, जिस पर समिति ने संतोष जताया। इसके बाद निर्णय लिया गया कि जांच को और तेज करने के लिए 8 मई को समिति खुद बोकारो का दौरा करेगी और जमीनी स्तर पर सभी रिकॉर्डों का निरीक्षण करेगी।

बैठक में समिति ने निर्देश दिया कि डीडीओ कोड से जुड़े सभी बैंक खातों के पिछले छह वर्षों के स्टेटमेंट, बजट आवंटन, फंड रिलीज, आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट और जांच से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएं।

अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि कई जिलों में वेतन प्रणाली के संचालन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। अब उच्च स्तरीय समिति यह भी जांच कर रही है कि क्या इन अनियमितताओं के पीछे कोई संगठित प्रयास था।

फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि बोकारो दौरे के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट होगी। इसके आधार पर दोषियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि पूरा नेटवर्क अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है।

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