खार पुलिस की जांच में खुलासा; टेलीग्राम पर ऑनलाइन काम और भारी मुनाफे का झांसा देकर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार, अपने और दूसरों के नाम पर खाते खुलवाकर साइबर जालसाजों को सौंपने का आरोप

मुंबई में साइबर ठगी के खातों का बड़ा नेटवर्क पकड़ा, 42 मामलों में ₹7.42 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी से कनेक्शन

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मुंबई: मुंबई पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में दर्ज कम से कम 42 साइबर धोखाधड़ी के मामलों में किया गया। इन मामलों में कुल ठगी की रकम ₹7.42 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए सक्रिय साइबर जालसाजों का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें और कितने लोग शामिल हैं।

मामले की शुरुआत मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर ठगी की शिकायत से हुई। शिकायत के मुताबिक, पीड़ित से टेलीग्राम एप के जरिए संपर्क किया गया था। उसे ऑनलाइन काम पूरा करने के बदले भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। शुरुआत में आरोपी पक्ष ने पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए ऑनलाइन कार्य और भुगतान से जुड़ी गतिविधियां कराईं। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने के लिए कहा गया।

पीड़ित ने आरोपियों के बताए विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 लाख जमा किए। बाद में उसे पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। इसी दौरान संदिग्ध बैंक खातों और उनसे जुड़े लेनदेन का विश्लेषण किया गया।

तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने अविनाश बाबासाहेब खरात और विकास गजानन भुजबल की कथित संलिप्तता का पता लगाया। दोनों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। जांच में आरोप है कि आरोपियों ने अपने नाम के अलावा अन्य लोगों के नाम पर भी बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों को बाद में साइबर जालसाजों को सौंप दिया जाता था, ताकि ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया जा सके।

पुलिस के अनुसार, ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ठगी के बाद पीड़ितों से हासिल रकम सीधे मुख्य आरोपियों के खातों में जाने के बजाय कई खातों के बीच घुमाई जाती है। इससे रकम के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना और पूरे नेटवर्क की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इस तरह के खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

जांच में सामने आए 42 मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। इन मामलों में कुल ₹7.42 करोड़ से अधिक की कथित साइबर धोखाधड़ी का कनेक्शन सामने आया है। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों में हुए पुराने लेनदेन की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपियों ने कितने समय से खातों की व्यवस्था साइबर अपराधियों के लिए की थी और कितनी रकम इन खातों के जरिए आगे भेजी गई।

टेलीग्राम के जरिए ऑनलाइन काम और आसान मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह लगातार लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में शुरुआत में छोटे भुगतान या आसान कार्य देकर भरोसा बनाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को अधिक निवेश या अलग-अलग खातों में रकम भेजने के लिए प्रेरित किया जाता है। रकम जमा होने के बाद जालसाज संपर्क बंद कर देते हैं या अतिरिक्त भुगतान की मांग करते हैं।

मुंबई पुलिस की कार्रवाई से यह भी सामने आया है कि साइबर ठगी केवल कॉल, संदेश या फर्जी वेबसाइट तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंक खातों की व्यवस्था करने वाला एक समानांतर नेटवर्क भी इन अपराधों को संचालित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उन साइबर जालसाजों और अन्य खाताधारकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया।

हमसे जुड़ें

Share This Article