दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के रहने वाले आरोपियों ने बिना कारोबार किए किया बड़ा क्लेम, राजस्व को भारी नुकसान

नागफनी में बोगस फर्म से जीएसटी फ्रॉड: 10.95 करोड़ का झटका, पांच आरोपी नामजद

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By Roopa
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मुरादाबाद: नागफनी थाना क्षेत्र में पांच आरोपियों के खिलाफ बोगस फर्म बनाकर बिल ट्रेडिंग करके जीएसटी फ्रॉड करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम निवासी दो महिलाओं समेत पांच लोगों ने बिना कोई वास्तविक कारोबार किए जीएसटी आईटीसी (Input Tax Credit) का क्लेम किया। इससे सरकारी खजाने को कुल 10 करोड़ 95 लाख 64 हजार 180 रुपये का नुकसान हुआ।

राज्य कर (जीएसटी) खंड-2 की उपायुक्त रीना ने नागफनी पुलिस को तहरीर दी कि दिल्ली के मचला मार्ग निवासी फर्म डायरेक्टर रेनू सतीजा, नोएडा के छिजारसी निवासी विकास अहलावत, हरियाणा के गुरुग्राम सेक्टर 12 जीएफ सेंट्रोल पार्क निवासी रेखा गिल, दिल्ली के हरिनगर निवासी भूषण कुमार चंद्रा और दिल्ली के मचला मार्ग निवासी चांद सतीजा ने “सैमसंग ओवरसीज लिमिटेड” नाम से 24 अगस्त 2018 को एक फर्म का पंजीकरण कराया।

इस फर्म ने अपना व्यापारिक पता नागफनी, दौलतबाग का दिखाया। उपायुक्त रीना ने बताया कि 15 नवंबर 2018 को व्यापार स्थल का सर्वेक्षण किया गया तो पता चला कि वहां कोई वास्तविक व्यापार नहीं चल रहा था। इसके बाद 16 नवंबर 2018 को इस फर्म का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बिल ट्रेडिंग के जरिए जीएसटी आईटीसी क्लेम किया, जबकि असली कारोबार अस्तित्व में नहीं था। इस तरह उन्होंने सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर फ्रॉड करना अब बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है, और यह सीधे सरकारी राजस्व को प्रभावित करता है।

नागफनी थाने के एसपी सिटी, कुमार रणविजय सिंह ने कहा कि तहरीर के आधार पर पांच नामजद आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है। मामले में शामिल हैं—रेनू सतीजा, विकास अहलावत, रेखा गिल, भूषण कुमार चंद्रा और चांद सतीजा। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है और सभी आरोपियों की संपत्तियों तथा लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी फ्रॉड की यह घटना बोगस कंपनियों और फर्जी बिलिंग के खतरे को उजागर करती है। ऐसे फ्रॉड में अक्सर कंपनियां केवल कागजी कारोबार दिखाकर आईटीसी क्लेम करती हैं, जिससे लाखों या करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से गायब हो जाते हैं।

आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, फर्जी फर्म पंजीकरण के समय सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर चुकी थी, लेकिन असल में व्यापारिक गतिविधि कभी शुरू नहीं हुई। यही वजह है कि जांच में स्पष्ट हुआ कि यह व्यवस्थित फ्रॉड था।

अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और कानूनी दबाव आवश्यक है। नागफनी थाने की पुलिस और राज्य कर विभाग की संयुक्त जांच से इस फ्रॉड का पूरा नेटवर्क उजागर किया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी संदिग्ध कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जीएसटी फ्रॉड रोकने के लिए व्यापारिक संस्थाओं की पृष्ठभूमि और वास्तविक कारोबार की जांच पहले से करनी चाहिए। केवल कागजी दस्तावेजों पर भरोसा करना बड़े राजस्व घाटे का कारण बन सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों को कानूनी शिकंजे में लाने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने व्यापारिक और कर प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है।

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