उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां बाणसागर नहर परियोजना से जुड़े एक अवर अभियंता (जेई) को ₹1 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि जेई ने करीब ₹1 करोड़ के बिल को पास कराने के बदले यह रकम मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को उसके आवास से पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार, यह मामला बाणसागर नहर निर्माण परियोजना से संबंधित है, जहां प्रयागराज निवासी एक ठेकेदार को लगभग ₹4 करोड़ का ठेका मिला था। परियोजना के तहत करीब ₹3 करोड़ का काम पूरा किया जा चुका था, जबकि शेष कार्य प्रगति पर था। पूरे हुए कार्य का भुगतान पाने के लिए बिल पास कराना आवश्यक था, लेकिन आरोप है कि संबंधित जेई इस प्रक्रिया को जानबूझकर टाल रहा था।
ठेकेदार के प्रतिनिधि दीपक, जो प्रयागराज के मेजा क्षेत्र का निवासी है, ने आरोप लगाया कि जब वह बिल पास कराने के लिए जेई से मिला, तो उससे ₹1 लाख की रिश्वत की मांग की गई। यह भी कहा गया कि बिना पैसे दिए फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। लगातार दबाव और देरी से परेशान होकर उसने एंटी करप्शन शाखा में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले की प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए एक सुनियोजित ट्रैप प्लान तैयार किया गया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट दिए गए और तय समय पर उसे आरोपी के पास भेजा गया।
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बताया गया कि निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकर्ता ₹1 लाख की राशि लेकर बाणसागर कॉलोनी स्थित जेई के आवास पर पहुंचा। जैसे ही आरोपी ने पैसे स्वीकार किए, पहले से मौके पर तैनात एंटी करप्शन टीम ने तुरंत दबिश देकर उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई, जिससे साक्ष्यों को मजबूत किया जा सके।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को स्थानीय थाने लाया गया, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि यह घटना एक अलग मामला नहीं हो सकती, बल्कि परियोजना से जुड़े भुगतान प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार का एक व्यवस्थित पैटर्न मौजूद हो सकता है। अब जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस पूरे मामले में अन्य कर्मचारी या किसी प्रकार का नेटवर्क भी शामिल है।
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। परियोजना से जुड़े अन्य ठेकेदारों और कर्मचारियों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद ऐसे अन्य मामलों की भी जांच तेज हो सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इस तरह के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को सेवा से बर्खास्तगी के साथ-साथ जेल की सजा का भी सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
फिलहाल, जांच एजेंसियां पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि भ्रष्टाचार का यह तंत्र कितना व्यापक है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
