मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां सिम बॉक्स तकनीक के जरिए फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चलाकर विदेशी कॉल्स को लोकल कॉल में बदला जा रहा था। इस अवैध सिस्टम के माध्यम से न केवल टेलीकॉम नियमों को दरकिनार किया जा रहा था, बल्कि मोटी कमाई भी की जा रही थी। मामले में कार्रवाई करते हुए एटीएस ने मेरठ और हापुड़ में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले करीब छह महीनों से सक्रिय था और बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने सिम बॉक्स डिवाइस के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को लोकल नंबर में कन्वर्ट करने की तकनीक अपनाई थी। इससे कॉल ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था और टेलीकॉम कंपनियों को भारी राजस्व नुकसान पहुंचता था।
पूछताछ में मुख्य आरोपी सद्दाम का नाम सामने आया, जिसने अपने परिचितों के जरिए नोएडा के एक युवक से संपर्क साधा था। इसी युवक के माध्यम से सिम बॉक्स उपकरण ‘ऑन डिमांड’ मंगवाए गए। इसके बाद मेरठ में पूरा तकनीकी सेटअप तैयार किया गया और धीरे-धीरे हापुड़ तक इस नेटवर्क का विस्तार किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, सिम बॉक्स डिवाइस आमतौर पर चीन और कुछ अन्य देशों में तैयार किए जाते हैं और इन्हें अवैध चैनलों के जरिए भारत में सप्लाई किया जाता है। ये उपकरण एक साथ कई सिम कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं और इंटरनेट के माध्यम से आने वाली विदेशी कॉल्स को भारतीय मोबाइल नंबर में बदल देते हैं। इस प्रक्रिया को ‘कॉल मास्किंग’ या ‘कॉल रूटिंग फ्रॉड’ कहा जाता है।
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जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क का संबंध हवाला कारोबार से भी जुड़ा हो सकता है। विदेशी कॉल्स को लोकल में बदलकर संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देना और अवैध लेनदेन को छिपाना इस नेटवर्क के प्रमुख उद्देश्य माने जा रहे हैं। इसके अलावा, साइबर अपराधियों को सिम और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की आशंका भी जताई जा रही है।
गौरतलब है कि 18 मार्च को मेरठ के लिसाड़ीगेट क्षेत्र में भी एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा गया था, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और तीन सिम बॉक्स के साथ 32 सिम कार्ड बरामद किए गए थे। उस कार्रवाई के दौरान कुछ अन्य स्थानों के इनपुट भी मिले थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर सभी आरोपियों तक पहुंच नहीं बन पाई थी।
ताजा कार्रवाई को उसी कड़ी का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें अब एटीएस ने व्यापक स्तर पर छानबीन शुरू की है। जांच टीम अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को खंगाल रही है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सिम बॉक्स फ्रॉड का इस्तेमाल अक्सर फिशिंग, कॉल सेंटर स्कैम और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी में किया जाता है। इससे अपराधियों की पहचान छिपी रहती है और जांच एजेंसियों के लिए ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की तलाश तेज कर दी गई है।
