नकली इनवॉइस और फर्जी ITC क्लेम से सरकार को बड़ा नुकसान; आधार-पैन के दुरुपयोग से बनाई गईं कई शेल कंपनियां

फर्जी कंपनियों के सहारे ₹17 करोड़ का GST घोटाला: मेरठ में गैंग का पर्दाफाश, एक आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक बड़े GST घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में शामिल एक गैंग के सदस्य को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने फर्जी कंपनियां बनाकर और नकली इनवॉइस जारी कर लगभग ₹17 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

पुलिस के अनुसार, यह घोटाला लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। आरोपी फर्जी दस्तावेजों के जरिए कंपनियां बनाते और फिर उनके माध्यम से टैक्स चोरी और फर्जी रिटर्न दाखिल करते थे। मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान वसीम अख्तर उर्फ मोनू (38), निवासी गाजियाबाद के रूप में हुई है।

फर्जी आधार-पैन से खड़ी की गईं कंपनियां

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों ने नकली आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर कई फर्जी फर्में रजिस्टर कराईं। इन कंपनियों का वास्तविक कोई कारोबार नहीं था, बल्कि इन्हें केवल कागजों पर चलाया जाता था।

इन फर्जी फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर नकली बिल (इनवॉइस) तैयार किए जाते थे, जिनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया जाता था। इस तरह बिना किसी वास्तविक लेनदेन के टैक्स रिफंड हासिल कर लिया जाता था।

ई-वे बिल में हेरफेर कर बढ़ाया फर्जीवाड़ा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गैंग ने ई-वे बिल प्रणाली में भी हेरफेर किया। माल की आवाजाही के लिए जरूरी इस डिजिटल दस्तावेज का दुरुपयोग कर फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाए जाते थे, जिससे पूरे नेटवर्क को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।

इस तकनीक के जरिए आरोपियों ने न केवल टैक्स चोरी की, बल्कि सरकारी निगरानी तंत्र को भी लंबे समय तक गुमराह किया।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हुई गिरफ्तारी

पुलिस को इस पूरे रैकेट की जानकारी एक गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए मिली। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने अपराध को स्वीकार किया और बताया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था। हालांकि, इस नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

संगठित गिरोह के संकेत, जांच का दायरा बढ़ा

अधिकारियों का मानना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो अलग-अलग राज्यों में इसी तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम दे सकता है।

जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क के तार कहां तक जुड़े हैं और कितनी फर्जी कंपनियों के जरिए यह घोटाला किया गया। साथ ही, अन्य संभावित संदिग्धों और लाभार्थियों की पहचान भी की जा रही है।

GST सिस्टम में खामियों का उठाया फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के घोटाले GST सिस्टम में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर किए जाते हैं। फर्जी इनवॉइस और ITC क्लेम के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया जाता है।

हालांकि, हाल के वर्षों में GST नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई तकनीकी सुधार किए गए हैं, लेकिन इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि अभी भी निगरानी को और सख्त करने की जरूरत है।

राजस्व सुरक्षा के लिए सख्त कदम जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि टैक्स सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी फर्मों की पहचान, डिजिटल वेरिफिकेशन और डेटा एनालिटिक्स के जरिए ऐसे घोटालों पर लगाम लगाई जा सकती है।

पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।

मेरठ में सामने आया यह ₹17 करोड़ का GST घोटाला इस बात का संकेत है कि आर्थिक अपराध अब तकनीकी और संगठित रूप ले चुके हैं, जिनसे निपटने के लिए सख्त और आधुनिक रणनीति अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।

हमसे जुड़ें

Share This Article