मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को चोट पहुंचाने वाले नकली किताबों के संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। मेरठ में शुक्रवार रात कार्रवाई करते हुए पुलिस ने National Council of Educational Research and Training (NCERT) की करीब 13 हजार फर्जी किताबें बरामद कीं और इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से वेस्ट यूपी और आसपास के राज्यों में नकली पुस्तकों की सप्लाई कर रहा था।
पूरी कार्रवाई मवाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान शुरू हुई, जहां एक कार और टाटा मैजिक वाहन को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी में कक्षा 1 से 12 तक की विभिन्न विषयों की करीब 2 हजार संदिग्ध किताबें बरामद हुईं। मौके पर ही किताबों की गुणवत्ता और प्रिंटिंग पर शक होने के बाद चारों आरोपियों—राहुल राणा, हर्ष, बाबर और राहुल यादव—को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
पूछताछ में आरोपियों ने एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने मटौर गांव स्थित एक गोदाम पर छापा मारा, जहां से 11 हजार और नकली किताबें बरामद की गईं। इस तरह कुल बरामदगी 13 हजार तक पहुंच गई। अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई किताबें पहली नजर में असली जैसी दिखती थीं, लेकिन कागज की गुणवत्ता, प्रिंटिंग और बाइंडिंग में अंतर पाया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी इन नकली किताबों को सस्ते दामों पर छापकर बाजार में असली किताबों के नाम पर बेचते थे। इससे न केवल छात्रों और अभिभावकों को आर्थिक नुकसान होता था, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी सीधा असर पड़ता था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी किताबों में अक्सर गलत या अधूरी जानकारी होती है, जिससे छात्रों की तैयारी प्रभावित हो सकती है।
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पूछताछ में मुख्य आरोपी राहुल राणा ने बताया कि यह खेप अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई की जानी थी। कार से मोदीनगर के सुभाष सिंघल को और टाटा मैजिक के जरिए उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित एक पुस्तक विक्रेता तक किताबें पहुंचाई जानी थीं। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों ने सप्लाई चेन के अन्य कड़ियों की भी तलाश शुरू कर दी है।
मामले की पुष्टि के लिए मौके पर विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया, जिसने जांच के बाद इन किताबों को पूरी तरह नकली घोषित किया। इसके बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
गौरतलब है कि मेरठ समेत वेस्ट यूपी में नकली किताबों का कारोबार कोई नया नहीं है। इससे पहले भी कई मामलों में बड़ी बरामदगी और गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। कुछ समय के लिए यह नेटवर्क शांत हो जाता है, लेकिन फिर नए तरीके से सक्रिय होकर बाजार में नकली किताबों की सप्लाई शुरू कर देता है। इस बार भी प्रारंभिक संकेत यही हैं कि यह गिरोह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी है। अभिभावकों और छात्रों को केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही किताबें खरीदनी चाहिए और संदिग्ध रूप से सस्ती किताबों से बचना चाहिए।
फिलहाल पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन नकली किताबों की छपाई कहां हो रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
