मेरठ: मेरठ से एक हैरान कर देने वाला साइबर ठगी मामला सामने आया है, जिसमें स्थानीय किसान मदनपाल को ऑनलाइन खाते में ₹38 लाख ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। ठगों ने उन्हें 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जोड़ा होने का झूठा डर दिखाया। यह घटना फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से हुई, जिसमें अपराधियों ने महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी होने का दावा किया। मेरठ साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फलावदा थाना क्षेत्र के अमरौली गांव निवासी मदनपाल ने बताया कि 11 फरवरी 2026 को उन्हें अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को महाराष्ट्र पुलिस हेडक्वार्टर का सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार बताया। आरोपी ने कहा कि आतंकियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान उनके आधार और एटीएम कार्ड मिले हैं, जिससे पुलवामा हमले में उनकी भी भूमिका सामने आई। इस fabricated धमाके से उन्हें डराने और पैसे दिलवाने की कोशिश की गई।
पीड़ित ने बताया कि ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए आतंकियों की तस्वीरें भेजीं और कहा कि उन्होंने भारतीय सैनिकों पर हमले में भी हिस्सा लिया। उन्होंने लगातार चेतावनी दी कि किसी को कुछ बताने पर तत्काल गिरफ्तारी, 10 साल की सजा और ₹60 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।
मदनपाल के अनुसार, आरोपी वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखते थे। उन्होंने उनसे भारत माता की शपथ दिलवाई और रोजाना कई बार “जय हिंद” बोलने का दबाव डाला। इसके साथ ही उन्हें ऑनलाइन हाजिरी देने का आदेश दिया गया। ठगों ने मानसिक रूप से उन्हें इस बात में फंसा दिया कि केवल उनकी आज्ञा पालन से ही सुरक्षा संभव है।
कई दिनों तक डर के चलते, मदनपाल ने 13 फरवरी को एसबीआई गंज बाजार शाखा से ₹33 लाख और 18 फरवरी को बैंक ऑफ बड़ौदा फलावदा शाखा से ₹5 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर किए। ठगों ने कहा था कि अगर वह मामले से बरी हो गए तो पैसा वापस कर दिया जाएगा, लेकिन मदनपाल को कभी राशि नहीं मिली। 25 मार्च तक रकम नहीं लौटने पर उन्होंने 26 मार्च को साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला साइबर अपराधियों के बढ़ते पैटर्न को दर्शाता है, जिसमें वे डर, अधिकारियों के भेष और राष्ट्रीय सुरक्षा के झूठे दावों का उपयोग करके बड़ी रकम ऐंठते हैं। “ठग अक्सर आतंक और अधिकार का डर दिखाकर पीड़ितों को बिना सवाल किए धन ट्रांसफर करवा लेते हैं,” एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने बताया।
पुलिस और साइबर क्राइम अधिकारी अब ठगों की पहचान और पैसे के फ्लो को ट्रैक कर संभावित नेटवर्क का पता लगा रहे हैं। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि आरोपी कई स्थानों से काम कर रहे हो सकते हैं और वर्चुअल अकाउंट्स व गुमनाम चैनलों का उपयोग कर रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह मामला ग्रामीण और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में बड़े साइबर रैकेट से जुड़ा है।
मदनपाल का मामला साइबर डर और फिशिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को उजागर करता है। अधिकारियों की सलाह है कि किसी भी तरह की धमकी या unverifiable कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को रिपोर्ट करें।
यह घटना उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी की बढ़ती प्रवृत्ति का नवीनतम उदाहरण है। राज्य के कई जिलों में नकली पुलिस पहचान, आतंकवादी धमकियों और ऑनलाइन दबाव के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी के मामले सामने आए हैं। साइबर क्राइम यूनिट ने संदिग्ध लेनदेन और असामान्य ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी तेज कर दी है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और कॉल्स का पता लगाने से ठगों की गिरफ्तारी और नेटवर्क का खुलासा संभव होगा। यह मामला साइबर अपराधियों की मनोवैज्ञानिक चालाकी और डिजिटल सतर्कता की आवश्यकता का एक स्पष्ट उदाहरण है।
