मेरठ: सेंट्रल बैंक में नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई युवाओं से कुल ₹41.80 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि परमेश त्यागी, उसके बेटे देव त्यागी और अर्पित उर्फ मिहिर आनंद समेत पांच लोगों ने नौकरी दिलाने के नाम पर रकम ली और इसके बाद पीड़ितों की कथित बैंक अधिकारियों से फोन पर बातचीत कराकर उनका भरोसा बनाए रखा। तीन महीने में नियुक्ति का आश्वासन दिया गया, लेकिन समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। रकम वापस मांगने पर आरोपियों पर धमकी देने और लाठी-डंडों से मारपीट करने का भी आरोप है। एसएसपी के आदेश के बाद मेडिकल थाने में पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता ईश्वर सिंह जागृति विहार के निवासी हैं। उनके अनुसार, सेवायोजन कार्यालय में उनकी मुलाकात शिवशक्ति विहार निवासी परमेश त्यागी से हुई थी। आरोप है कि परमेश ने दावा किया कि वह सेंट्रल बैंक में ‘सब-स्टाफ’ पद पर युवाओं की नियुक्ति करा सकता है। उसकी बात पर भरोसा करते हुए कुछ युवाओं और उनके परिजनों ने नौकरी के लिए उससे संपर्क किया।
घर बुलाकर भरवाए आवेदन, मांगे गए लाखों रुपये
शिकायत के मुताबिक, परमेश त्यागी ने नौकरी के इच्छुक युवाओं को अपने घर बुलाया। वहां उसके बेटे देव त्यागी और अर्पित उर्फ मिहिर आनंद ने अभ्यर्थियों के आवेदन फॉर्म भरवाए। आरोप है कि प्रत्येक उम्मीदवार से नौकरी लगवाने के बदले करीब ₹5 लाख की मांग की गई।
ईश्वर सिंह की गारंटी पर 20 मई 2025 को अभिषेक मुदगल, अंश गुप्ता, रिदम अरोड़ा, वाशु भारद्वाज, शुभम, राहुल गिरी और सुमित नागर समेत कई युवाओं ने परमेश त्यागी, देव त्यागी और अर्पित को कुल ₹41.80 लाख दिए। आरोपियों ने रकम लेने के बाद तीन महीने के भीतर नियुक्ति कराने का भरोसा दिलाया।
कथित बैंक अधिकारियों से फोन पर कराई बात
पीड़ितों का विश्वास बनाए रखने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर मोबाइल फोन पर उनकी बातचीत ‘पोपी शर्मा’ नाम की महिला से कराई। उसे सेंट्रल बैंक की एचआर अधिकारी बताया गया। इसके बाद ‘सुशांत त्यागी उर्फ प्रतीक शर्मा’ नाम के एक अन्य व्यक्ति से भी मिलवाया गया, जिसे बैंक अधिकारी बताया गया था।
तीन महीने बीतने के बाद भी जब नियुक्ति पत्र नहीं मिला तो युवाओं ने आरोपियों से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, इस पर उन्हें जल्द ऑफर लेटर मिलने का आश्वासन दिया गया और ‘राजेश शर्मा’ नाम के एक अन्य कथित बैंक अधिकारी से संपर्क कराया गया। समय बीतने के साथ पीड़ितों को कथित तौर पर पूरे तंत्र के फर्जी होने का संदेह होने लगा।
नौकरी नहीं मिली तो रकम वापस मांगने लगे
काफी समय गुजरने के बाद भी नियुक्ति नहीं होने पर युवाओं ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। आरोप है कि तय समय में पैसे वापस नहीं किए गए। इसके बाद पीड़ित रकम मांगने के लिए परमेश त्यागी के घर पहुंचे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वहां आरोपियों ने रकम लौटाने के बजाय आत्महत्या करने और पीड़ितों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। विवाद बढ़ने पर लाठी-डंडों से मारपीट किए जाने का भी आरोप है। घटना के बाद पीड़ितों ने मेडिकल थाने में शिकायत दी।
SSP से शिकायत के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
पीड़ितों का आरोप है कि शुरुआती शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। आदेश के बाद मेडिकल थाने में परमेश त्यागी समेत पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और धमकी से संबंधित धाराओं में नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई।
जांच में पुलिस अब आरोपियों द्वारा नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने, कथित बैंक अधिकारियों की पहचान और उनके साथ संपर्कों की पड़ताल कर रही है। मामले में आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच के जरिए रकम के लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा सकता है।
₹41.80 लाख के लेनदेन और अन्य पीड़ितों की तलाश
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित बैंक अधिकारियों से पीड़ितों की बातचीत किन मोबाइल नंबरों से कराई गई और इन नंबरों का इस्तेमाल कौन कर रहा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम सीधे आरोपियों तक पहुंची या किसी अन्य खाते अथवा माध्यम से उसका लेनदेन हुआ।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य युवाओं को भी बैंक में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका तय करने और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
